नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली-एनसीआर सहित देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े निर्माण कार्यों के लिए अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। 20 हजार वर्ग मीटर से बड़े निर्माण कार्यो के साथ ही सीएंडडी वेस्ट प्लांट एवं आभूषणों के हाल मार्किंग सेंटरों को भी प्रदूषण के नजरिये से आरेंज श्रेणी में डाला गया है।

गौरतलब है कि सीपीसीबी ने 242 उद्योग-धंधों को उनसे होने वाले प्रदूषण के मद्देनजर विभिन्न चार श्रेणियों रेड, आरेंज, ग्रीन एवं व्हाइट में बांटा हुआ है। इसी दिशा में अब आरेंज श्रेणी का दायरा और विस्तृत कर दिया गया है। अभी तक इस श्रेणी में 87 उद्योग-व्यवसाय शामिल थे। अब 88 नंबर पर भवन एवं निर्माण परियोजनाओं, 89 पर सीएंडडी वेस्ट प्लांट तथा 90 पर आभूषणों के हाल मार्किग सेंटरों को रख दिया गया है।

दरअसल, लंबे समय से यह देखने में आ रहा था कि निर्माण स्थलों, मलबे से टाइल इत्यादि बनाने वाले सीएंडडी वेस्ट प्लांट और आभूषण निर्माण वाली इकाइयों से भी वायु एवं जल दोनों तरह का प्रदूषण फैल रहा है। समय-समय पर इनके खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या समिति द्वारा कार्रवाई भी की जाती रही है। दिल्ली में तो सभी बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी स्माग गन लगाना भी अनिवार्य किया जा चुका है। सीपीसीबी के सदस्य सचिव प्रशांत गार्गवा की ओर से जारी इस आशय के लिखित आदेश विभिन्न राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं समितियों को प्रेषित कर दिए गए हैं। साथ ही वेबसाइट पर भी डाल दिए गए हैं। सभी को अपने यहां इस आदेश को तत्काल प्रभाव से क्रियान्वित करने एवं 15 दिनों के भीतर इस बाबत सीपीसीबी को एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजने का निर्देश भी दिया गया है।

कितने प्रदूषण इंडेक्स पर कौन सी श्रेणी

  • श्रेणी प्रदूषण इंडेक्स
  • रेड 60 या अधिक
  • आरेंज 41 से 59
  • ग्रीन 21 से 40
  • व्हाइट 20 या कम

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