नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर आम आदमी पार्टी (आप) की मान्यता रद करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि जनता के पैसे का उपयोग कर सार्वजनिक तौर पर गणेश चतुर्थी पर पूजा आयोजित की गई है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर 18 नवंबर तक विस्तृत जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता व अधिवक्ता एमएल शर्मा ने याचिका में कहा है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सरकार कोई धार्मिक कार्य का आयोजन नहीं कर सकती है।

संविधान में सरकारों को धार्मिक आयोजनों के संचालन की अनुमति नहीं है, जबकि दिल्ली सरकार ने दस सितंबर को कार्यक्रम का आयोजन किया और इसका लाइव प्रसारण भी किया गया। ऐसे में राजनीतिक दल के तौर पर आप की मान्यता रद की जाए। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धांत कुमार ने कहा कि याचिकाकर्ता के दबाव में आकर राजनीतिक दलों की मान्यता रद नहीं की जा सकती है।

नहीं हुआ कानून का उल्लंघन

दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने दलील दी कि इस वर्ष गणेश चतुर्थी समारोह का आयोजन और प्रसारण जनहित में किया गया है, ताकि कोरोना महामारी के बीच सार्वजनिक रूप से लोगों के स्वास्थ्य की कामना की जा सके। इसका राजकोष के पैसे से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी को कुछ भी प्रसारित करने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है और न ही कानून का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक उत्सव में सरकारी व्यवस्था नई बात नहीं है। हर बार कुंभ व अमरनाथ यात्रा के दौरान ऐसा होता है। मेहरा ने दलील दी कि यह याचिका राजनीति से प्रेरित है और इसे जुर्माना लगाकर खारिज किया जाए।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari