नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में बरकरार ऑक्सीजन संकट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को भी सुनवाई जारी है। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा है कि क्या एक ऑक्सीजन सिलेंडर बैंक बनाया जा सकता है। इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान हर दिन आवंटन के सापेक्ष आपूर्ति में बदलाव को लेकर मिल रही शिकायत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि अस्पतालों के लिए आक्सीजन आवंटन की न्यूनतम मात्रा तय की जाए, ताकि अस्पताल हालात को बेहतर तरीके से संभाल सकें।

वहीं, अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने सुझाव दिया कि अस्पतालों को आक्सीजन की स्थिति की जानकारी दिन में चार पर बतानी चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अधिकारियों के रोटेशन की भी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि एक ही अधिकारी 18 घंटे काम करने को बाध्य नहीं हो।

सुनवाई के दौरान रेस्क्यू अस्पताल की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि आक्सीजन आपूर्ति में हर समय बदलाव किया जा रहा है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। इसके जवाब में राहुल मेहरा ने कहा कि आपूर्ति पर्याप्त नहीं है और अस्पतालों ने बेड की क्षमता कम कर दी है। इसके कारण हमने मांग को दोबारा से निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को दी जाने वाली आपूर्ति में लगातार बदलाव हो रहा है।

बता दें कि दिल्ली में ऑक्सीजन आपूर्ति धीरे-धीरे सुचारू हो रही है। दिल्ली को मंगवलार को 205 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन मिलने जा रही है। इनमें से 120 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) दिल्ली पहुंच चुकी है।  दिल्ली में मंगलवार सुबह ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन पहुंची। इस ट्रेन में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) से भरे हुए 6 टैंकर थे, जिससे दिल्ली के मरीजों को 120 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन मिलेगी।

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