नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। कोरोना महामारी के दौरान रेलवे के आधारभूत ढांचा को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों का असर रेल परिचालन पर दिखने लगा है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद अधिकांश ट्रेनें पटरी पर लौट आई हैं। अब ट्रेनों के देर से चलने की शिकायत बहुत कम हो गई हैं। इस समय उत्तर रेलवे में ट्रेनों की समयबद्धता 96 फीसद के करीब है। 2016-17 में यह मात्र 75 फीसद थी। यानी अब अधिकांश ट्रेनें समय पर चल रही हैं।

पांच सौ किलोमीटर ट्रैक की गति सीमा बढ़ाई गई

कोरोना की पहली लहर के दौरान करीब दो माह तक ट्रेनों की आवाजाही बंद थी। उसके बाद भी कई माह तक बहुत कम संख्या में ट्रेनें चल रही थीं। पटरियों पर बोझ कम होने का फायदा उठाते हुए संरक्षा व अन्य कार्यो को पूरा करने पर जोर दिया गया। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी अप्रैल व मई में ट्रेनों की संख्या काफी कम हो गई थी। इस दौरान भी कई काम पूरे किए गए। कोरोना काल में करीब साढ़े छह सौ किलोमीटर रेलवे पटरी का नवीनीकरण किया गया है।

बताया जा रहा है कि करीब 50 किलोमीटर दोहरीकरण का काम हुआ इससे पूरे उत्तर रेलवे में पांच सौ किलोमीटर के करीब ट्रैक की गति बढ़ाई गई है। नई दिल्ली से लुधियाना के बीच अब ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है।

डाटा लागर से की जाती है निगरानी

ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए डाटा लागर से निगरानी की जा रही है। पहले प्रत्येक रेल मंडल अपने यहां से गुजरने वाली ट्रेनों का समय लॉगबुक में दर्ज करता था। अपने मंडल में समयबद्धता को बेहतर दिखाने के लिए गलत समय भी दर्ज किए जाने की शिकायत मिलती थी। अब यह संभव नहीं है। बड़े रेल टर्मिनल व रेलखंड के इंटरचेंज पर डाटा लागर लगाए गए हैं। ट्रेन के गुजरते ही उसका समय इसमें दर्ज हो जाता है। यह पूरा काम ऑनलाइन होता है। इससे ट्रेनों के देरी से चलने के कारणों की पड़ताल में मदद मिलती है।

इन प्रमुख रेल खंडों पर भी बढ़ी है रफ्तार

  • पुरानी दिल्ली से साहिबाबाद
  • धुरी से लुधियाना
  • जालंधर सिटी से फिरोजपुर
  • लुधियाना से फिरोजपुर
  • अमृतसर से खेमकरण

Edited By: Jp Yadav