नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को कोरोना के 418 नए केस मिले। वहीं, दो लोगों की मौत हो गई। 394 मरीज ठीक हुए हैं। संक्रमण दर 2.69 से घटकर 2.27 प्रतिशत हो गई है। तीसरी लहर थमने के बाद पांच अप्रैल को कोरोना की संक्रमण दर एक प्रतिशत से ज्यादा हो गई थी। उस दिन से अब तक कोरोना के 38,755 मामले आ चुके हैं और 37,438 मरीज ठीक हो चुके हैं।

अब तक 96.60 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं। मृतकों की संख्या 49 हो गई है। सक्रिय मरीजों की संख्या मामूली रूप से बढ़कर 1841 हो गई है। इनमें से 93 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। पांच मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर और 36 मरीज आक्सीजन सपोर्ट पर हैं। वहीं, 24 घंटे में कोई कंटेनमेंट जोन कम न होने संख्या 638 ही रही।

अब अस्पतालों में टीबी के मरीज बढ़े

कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद अस्पतालों में टीबी के मरीज बढ़ रहे हैं। पिछले साल की तुलना में दिल्ली में अब तक 2010 मरीज अधिक देखे जा चुके हैं। वहीं, वर्ष 2020 में जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था, उसकी तुलना में अभी अस्पतालों में 18.89 प्रतिशत अधिक टीबी के मरीज देखे जा चुके हैं। डाक्टर कहते हैं कि पहले की तुलना में टीबी के मरीज अधिक गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल आ रहे हैं।

कोरोना संक्रमण शुरू होने पर दिल्ली में वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में टीबी मरीजों का पंजीकरण 26.19 प्रतिशत घट गया था। उस वक्त लाकडाउन के कारण भी मरीज अस्पतालों में नहीं आ रहे थे। कोरोना के मामले घटने के बाद इस साल अब तक दिल्ली में टीबी के 43 हजार से अधिक मरीज अस्पतालों में देखे जा चुके हैं। जबकि पिछले साल 23 मई तक दिल्ली में टीबी के 41,044 मामले देखे गए थे। हालांकि, वर्ष 2019 की तुलना में टीबी के मरीजों की संख्या अब भी कम है।

2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य

एम्स के मेडिसिन विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डा. नीरज निश्चल ने बताया कि टीबी मरीजों का पंजीकरण बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि मामले भी बढ़ गए हैं। दो साल में कोरोना के कारण मरीजों का पंजीकरण भी प्रभावित हुआ था। वर्ष 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य है। इसलिए सरकारी व निजी क्षेत्र के सभी अस्पताल इलाज के लिए पहुंचने वाले सभी मरीजों का पंजीकरण कर रहे हैं।

Edited By: Abhishek Tiwari