यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सरना का सिरसा पर सनसनीखेज आरोप, DSGMC में रखे हुए हैं नोटबंदी के पहले के 38 लाख पुराने नोट
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) की नई कार्यकारिणी गठित नहीं हुई है। अभी भी पुरानी कार्यकारिणी का कब्जा बरकरार ...और पढ़ें

नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) की नई कार्यकारिणी गठित नहीं हुई है। अभी भी पुरानी कार्यकारिणी का कब्जा बरकरार है, इसके कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) ने कमेटी के निवर्तमान पदाधिकारियों पर गुरुघर के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। शिअद सरना के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना व महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने रिकार्ड से 65 लाख रुपये गायब होने और खजाने से 38 लाख पुराने नोट (नोटबंदी से पहले के) बरामद होने का दावा किया है।
उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमीत शाह को पत्र लिखकर इसकी जांच कराने की मांग की है। पुलिस से भी इसकी शिकायत की गई है। वहीं, डीएसजीएमसी के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने सरना बंधुओं पर पुलिस ले जाकर गुरु घर की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से करने की घोषणा की है।
प्रेस वार्ता में सरना ने कहा कि गुरु घर का पैसा संगत के हित में खर्च करने के बजाय शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) को मजबूत करने के लिए पंजाब भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि शनिवार को डीएसजीएमसी कार्यालय में नवनिर्वाचित सदस्यों व अन्य नेताओं ने जांच की थी जिसमें 65 लाख रुपया का कोई हिसाब नहीं मिला। इसी तरह से चलन से बाहर किए गए नोट बरामद हुए हैं। फंड के दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। जल्द उपराज्यपाल से मिला जाएगा।
पुलिस से शिकायत कर कमेटी के खजाना सील करने की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि डीएसजीएमसी कार्यालय में गड़बड़ी की शिकायत पर पुलिस गई थी और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
वहीं, प्रेस वार्ता में सिरसा और महासचिव हरमीत सिंह कालका ने दावा किया कि डीएसजीएमसी के फंड के हिसाब में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने सरना पर शनिवार को डीएसजीएमसी कार्यालय में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरना किसी तरह से कमेटी का प्रबंध सरकार के हवाले करना चाहते थे। कहा कि पुराने नोट मनजीत सिंह जीके के कार्याकाल के थे और इसे जमा करने के लिए रिजर्व बैंक आफ इंडिया को उन्होंने पत्र लिखा था। अब वह बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। श्री अकाल तख्त सरना व जीके को पंथ से निष्कासित करना चाहिए।
