नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। कोरोना के संक्रमण के कारण दिल्ली के अस्पतालों में इन दिनों ऑक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। वहीं, कागजों में मौजूद ऑक्सीजन बेड और ऐप पर दिख रहे ऑक्सीजन बेड में करीब तीन हजार अंतर देखने को मिल रहा है। ऐसे में बेड खाली होने के बावजूद मरीजों को अस्पतालों की ठोकर खानी पड़ रही है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो मई को जारी आदेश के अनुसार कोरोना के इलाज के लिए अधिकृत अस्पतालों में कुल 24,529 बेड के लिए ऑक्सीजन का आवंटन व जरूरत निर्धारित की गई। इसमें आक्सीजन सपोर्ट वाले 19,357 बेड व 5172 आइसीयू बेड शामिल हैं। इस आदेश के अनुसार अस्पतालों में उपलब्ध करीब हर बेड पर ऑक्सीजन का प्रविधान किया गया है। वहीं, दिल्ली कोरोना ऐप पर अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए मंगलवार को कुल 21,541 बेड उपलब्ध दिख रहे थे, जिसमें 5234 आइसीयू बेड शामिल हैं। इसमें 1410 बेड खाली हैं।

ऐप के मुताबिक ज्यादातर बड़े सरकारी व निजी अस्पतालों में बेड भरे हुए हैं। इससे गंभीर मरीजों को इलाज में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है? कि यदि अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए 24,529 बेड हैं तो ऐप पर दिखते क्यों नहीं हैं? आरक्षित बेड में आइसीयू बेड भी शामिल हैं, जबकि अस्पतालों में दिल्ली कोरोना ऐप पर दर्ज बेड से अधिक बेड के लिए ऑक्सीजन का आवंटन किया गया है। इस वजह से अस्पतालों पर बेड खाली रखने का आरोप लगता रहा है। लोकनायक अस्पताल में अभी 1500 बेड की व्यवस्था है, जबकि इस अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट वाले 1400 व 400 आइसीयू बेड के लिए आक्सीजन आवंटित की गई है। कुछ इसी तरह की स्थिति डीडीयू, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी (आरजीएसएस) अस्पताल की है।

इस बारे में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की महानिदेशक डॉ. नूतन मुंडेजा से बात करने की कोशिश की गई, उन्हें मैसेज भी किया गया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अस्पतालों को आवंटित ऑक्सीजन

  • ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड- 19,357
  • ऑक्सीजन की जरूरत- 265.28 मीट्रिक टन
  • आइसीयू बेड- 5172
  • आइसीयू बेड के लिए ऑक्सीजन की जरूरत- 246.87 मीट्रिक टन
  • आवंटित ऑक्सीजन- 425 मीट्रिक टन
  • कुल ऑक्सीजन की जरूरत- 598.14 मीट्रिक टन

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