नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में दिल्ली की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यूनिट ने अब तक की सबसे बड़ी खेप पकड़ी है। यूनिट ने पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सक्रिय गिरोह के तस्करों की गिरफ्तारी आगरा और लुधियाना से की है। इनके कब्जे से 7 लाख 24 हजार 840 गोलियां, 1400 इंजेक्शन और सीबीसीएस की 80 बोतलें बरामद की गई हैं। आरोपितों की पहचान लुधियाना के मॉडल टाउन निवासी मनोज कुमार, आगरा के श्याम नगर निवासी गौरव कुमार अग्रवाल और आगरा के शाहगंज निवासी मोहित के रूप में हुई है।

इन दवाओं का प्रयोग मनोचिकित्सक दवाओं और गंभीर दर्द निवारक दवाओं के रूप में किया जाता है। लगातार इनके सेवन से नशे की लत लगती है और फिर नशे की लत को पूरा करने के लिए इन दवाओं का प्रयोग किया जाता है।

ये दवाएं फार्मा कंपनियों से डीलर और खुदरा विक्रेताओं को पहुंचाने के बजाय तस्करों को उपलब्ध कराई गई हैं। मामले में फार्मा कंपनियां, डीलर और खुदरा विक्रेताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इन दवाओं को जब्त करने और आरोपितों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन के तहत आगरा के कंसाइनर, पंजाब के कंसाइनर और कंडक्ट को गिरफ्तार किया गया है। दवाओं की सबसे पहली खेप दिल्ली में पकड़ी गईं, जो कूरियर के माध्यम से आगरा और फिर पंजाब भेजी जानी थी।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दिल्ली जोनल यूनिट के जोनल डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि साइकोट्रॉपिक दवाओं की तस्करी के बारे में जानकारी मिलने के बाद कुलदीप शर्मा के नेतृत्व में अमित कुमार, धनंजय सोम, सुनील कुमार, आदेश प्रकाश, नीरज कुमार, आनंद, सचिन, मनोज, राज कुमार मौर्य, राजीव, मनोज और चेतन को मिलाकर टीम बनाई गई।

सूचना मिली थी कि अवैध व्यापार में शामिल कुछ लोगों को साइकोट्रॉपिक दवाएं डीटीडीसी कोरियर के माध्यम से वितरित की जा रही है। इस पर दिल्ली में ट्रामाडोल की 50 हजार गोलियों वाले एक पार्सल को रोका गया। सत्यापन के बाद एक टीम ने लुधियाना में छापा मारा। जहां इस खेप को पहुंचना था। कूरियर का कंसाइनर आगरा में था। आगरा में इस पार्सल के रिसीवर का नाम मनोज कुमार पता लगा। जो लुधियाना का रहने वाला है।

पूछताछ में उसने बताया कि वह नियमित रूप से एक व्यक्ति आगरा के रहने वाले गौरव कुमार अग्रवाल से ऐसे पार्सल प्राप्त करता है। आगरा में टीम ने गौरव को गिरफ्तार किया और उसके गिरोह में शामिल आगरा निवासी मोहित के रूप में हुई। पूछताछ में मनोज ने बताया कि वह लुधियाना में केमिस्ट की दुकान चलाता है। उसके पास एनआरएक्स (नारकोटिक्स) और साइकोट्रोपिक दवाओं को खरीदने बेचने का लाइसेंस नहीं है। साइकोट्रोपिक दवाओं में भारी मुनाफा होने के चलते वह इसमें शामिल हुआ। वह पंजाब के विभिन्न हिस्सों में इन दवाओं की आपूर्ति करता है।

पूछताछ में गौरव ने बताया कि वह आगरा के दवा बाजार में थोक दवा डीलरों के लिए एक एजेंट का काम करता था। वह आगरा में विभिन्न स्रोतों से ऐसी खेप मंगवाता था। 50 हजार ट्रामाडोल का जब्त पार्सल गौरव ने मोहित से खरीदा था। पूछताछ में मोहित ने बताया कि ऐसी खेपों का बड़ा हिस्सा आगरा के शाहगंज में एक गोदाम में पड़ा है। वहां छापा मारकर 7 लाख 24 हजार 840 गोलियां व कैप्सूल, 1400 इंजेक्शन और 80 सीबीसीएस की बोतलें जब्त की गईं। जब्त साइकोट्रोपिक दवाएं वैध लाइसेंस वाली कंपनियों में बनाई जाती हैं। ऐसे में दवा बनाने से लेकर इन्हें विक्रेताओं तक भेजने वाली कूरियर कंपनियों की भी मामले में मिलीभगत की जांच की जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक

Posted By: Mangal Yadav

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस