नई दिल्ली [गौतम कुमार मिश्रा]। 2012 Delhi Nirbhaya Case: द्वारका में पिछले दो महीने से रोजाना रात आठ बजे निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला जा रहा है। खास बात यह है कि इस मार्च में निर्भया के माता-पिता भी रोजाना शामिल होते हैं।

निर्भया की मां का दावा, लोग अपनी इच्छा से निकाल रहे मार्च

निर्भया की मां बताती हैं कि लोग अपनी इच्छा से मार्च निकाल रहे हैं। यह उन सभी लोगों की लड़ाई है जो महिला सुरक्षा को लेकर शंका से भरे माहौल में जी रहे हैं। यह लड़ाई उन सभी लड़कियों की लड़ाई है जो घर से नौकरी के लिए, पढ़ाई के लिए, खरीदारी के लिए, अपनों से मिलने के लिए इस उम्मीद के साथ निकलती हैं कि वे काम पूरा होने पर सुरक्षित अपने घर लौट आएंगी। यह उम्मीद यकीन में तभी तब्दील होगा जब लड़कियों के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाले लोगों को एक कठोर संदेश दिया जाएगा। जब तक असामाजिक तत्वों को यह नहीं लगेगा कि उनके कृत्य का अंजाम फांसी हो सकता है, तब तक उनके मन में डर नहीं होगा। आज बदमाश यह सोचते हैं कि कुछ भी हो वे बच निकलेंगे। उनकी सोच को गलत साबित करने की जरूरत है।

बता दें कि निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने पटियाला हाउस अदालत में एक अर्जी दायर की है। इसमें कहा गया है कि विनय को सिजोफ्रेनिया (एक तरह का पागलपन) है और उसे इलाज की जरूरत है। अदालत को बताया गया कि विनय के सिर पर गंभीर चोट लगी है और उसके हाथ पर भी प्लास्टर लगा है।

तिहाड़ जेल प्रशासन की तरफ से अदालत में कहा गया कि विनय ने रविवार को जेल नंबर 3 के सेल में अपना सिर फोड़ लिया और उसको मामूली चोट आई थी, जिसका इलाज जेल में ही करा दिया गया है। जबकि विनय के वकील ने अदालत में कहा कि विनय के परिजनों के कहने पर वे उससे मिलने जेल गए थे। जहां देखा कि उसके सिर पर गंभीर चोट लगी है और हाथ भी टूटा हुआ है। वह लोगों को नहीं पहचान रहा है। यहां तक की उसने उन्हें और मां को भी नहीं पहचाना। अर्जी में कहा गया है कि विनय को एक मनोवैज्ञानिक की जरूरत है और उसे इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंस (इहबास) में भर्ती कराया जाए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेद्र राणा ने इस अर्जी पर शनिवार तक तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। चारों दोषियों के खिलाफ कोर्ट ने

निर्भया के दोषी विनय की ओर से उसके वकील एपी सिंह ने चुनाव आयोग में याचिका दाखिल की है। याचिका में विनय की दया याचिका पर दिल्ली सरकार द्वारा खारिज करने की राष्ट्रपति से की गई सिफारिश पर सवाल उठाए गए हैं। यह कहा गया है कि जब दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की गई थी तब दिल्ली में आचार संहिता लागू थी। विनय की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश जब सरकार ने की तब मनीष सिसोदिया मंत्री नहीं थे। इस सिफारिशी चिट्ठी पर हस्ताक्षर वाट्सएप के स्क्रीनशॉट से लगाई गई थी। जबकि दस्तखत डिजिटल होने चाहिए थे।

Posted By: JP Yadav

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