नई दिल्ली [अरविंद कुमार द्विवेदी]। मदनपुर खादर स्थित उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर बने रोहिंग्या कैंप को बृहस्पतिवार को पूरी तरह से खाली करवा लिया गया। जेसीबी के साथ सुबह मौके पर पहुंचे यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इसमें बनी झुग्गियाें को ढहाकर जमीन खाली करवा ली। कुल 2.10 हेक्टेयर के इस प्लाट में राेहिंग्या शरणार्थियों की 53 झुग्गियां थीं। हालांकि करीब डेढ़ माह पहले आग लगने के कारण पूरा कैंप जल गया था। तब सभी लोगों को बगल में शिफ्ट कर दिया गया था। उसके बावजूद इसमें कुछ झुग्गियां रह गई थीं। बृहस्पतिवार को उन्हें भी ढहा दिया गया।

यूपी के जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह ने ट्वीट कर जानकारी दी कि बृहस्पतिवार सुबह चार बजे ही सिंचाई विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी।

राेहिंग्या शरणार्थी लंबे समय से इस प्लाट पर झुग्गी बनाकर रह रहे थे। उन्हें दिल्ली सरकार की ओर से पानी व अन्य सुविधाएं दी जा रही थीं। इस जगह को खाली करवाने के लिए जब भी यूपी सिंचाई विभाग की टीम जाती थी, ये लोग विरोध करते थे। बृहस्पतिवार को पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची टीम ने अतिक्रमण हटाया। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे प्लाट की बाउंड्री करवा दी जाएगी।

 

कब्रिस्तान में कब्जा, हाई कोर्ट का नियमों के तहत कार्रवाई का आदेश

वहीं, बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे का आरोप लगाते हुए याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार, वक्फ बोर्ड और दक्षिणी दिल्ली निगम को तलब किया है। साथ ही कहा है कि मौका मुआयना कर नियमों के तहत उचित कार्रवाई करें। अगर कब्जा और अवैध निर्माण पाया जाता है तो जगह मुक्त करवाई जाए। युवा संघर्ष समिति की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि कब्रिस्तान की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। यहां पर खाने के सामान की दुकानें और कई दफ्तरों का निर्माण कर काम किया जा रहा है।

इतना ही नहीं बीएसईएस ने इन अवैध निर्माण को बिजली कनेक्शन भी दिया है। मुख्य पीठ ने इस पर याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या कभी संबंधित विभाग को इस बारे में शिकायत दी है, इस पर जवाब दिया गया कि कई बार शिकायत देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जमीन पर लगातार अवैध निर्माण हो रहा है और कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए जगह कम होती जा रही है।