नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। दिल्ली सरकार ने बुधवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट सूचित किया कि अंतरजातीय विवाह करने वाले युगलों को प्रताड़ित व धमकी देने की शिकायत की जांच के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक विशेष शाखा गठित की गई है। न्यायमूर्ति जेआर मिधा व न्यायमूर्ति ब्रजेश सेठी की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में दिल्ली सरकार ने बताया कि ऐसे युगलों को ठहराने के लिए एक सेफ-हाउस भी बनाया गया है। याचिका पर अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।

एक व्यक्ति द्वारा दाखिल की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसल राहुल मेहरा व अधिवक्ता चैतन्य गोसाई ने पीठ को बताया कि विशेष शाखा के गठन का फैसला 28 अगस्त को लिया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी महिला मित्र को उसकी मर्जी के खिलाफ उसके परिजनों ने बंधक बना लिया है क्योंकि वे दूसरी जाति में शादी करने के खिलाफ हैं।

हाई कोर्ट ने दिया था विशेष शाखा गठित करने का आदेश

याचिका में उसने दलील दी थी कि अंतरजातीय विवाद करने वाले युगलों की शिकायत सुनने के लिए विशेष शाखा गठित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी अब तक अनुपालन नहीं हुआ है। 27 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था अगर कोई विशेष शाखा गठित नहीं की गई है तो 11 अगस्त से पहले गठित करें। पीठ ने इसके साथ ही युवक की शिकायत दर्ज कर कानून के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया था। अदालत में स्थिति रिपोर्ट पेश करके दिल्ली सरकार ने बताया कि 14 अगस्त को बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में आने वाली शिकायतों से जुड़ी हेल्पलाइन को समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित किया जाएगा।

बता दें कि अंतरजातीय विवाह करने वाले युगलों को आमतौर पर परेशान किए जाने की शिकायतें आती रही हैं। पीड़ित अपने परिजनों से ही डरे रहते हैं। 

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