चार साल में ही जर्जर हुए नरेला के 2860 EWS फ्लैट, कहीं बीम गिर रही तो कहीं दीवारों में सीलन
नरेला हिंद अपार्टमेंट में ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए बने 2860 फ्लैट आवंटन के चार साल में ही जर्जर हो गए ...और पढ़ें

नरेला हिंद अपार्टमेंट के फ्लैट के स्लैब का टूटा हिस्सा। जागरण
HighLights
नरेला हिंद अपार्टमेंट के EWS फ्लैट चार साल में जर्जर।
बीम गिर रहे, दीवारों में सीलन, बिजली लाइनों से पानी टपक रहा।
डीडीए पर लापरवाही का आरोप, निवासियों की सुरक्षा खतरे में।
संजय कुमार, बाहरी दिल्ली। नरेला हिंद अपार्टमेंट में ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए बनाए गए 2860 फ्लैट अलाटमेंट के चार साल बाद ही जर्जर हो गए हैं। यहां कहीं बीम का हिस्सा गिर रहा है तो कहीं दीवारों में सीलन आ रही है।
बिजली की लाइनों से पानी टपक रहा है, जिससे करंट उतरने का खतरा भी बना हुआ है। यहां रह रहे लोगों का आरोप है कि डीडीए को शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। शिकायत करने के बाद अधिकारी आते भी हैं और चले भी जाते हैं, लेकिन समस्या का समाधान तक नहीं होता।
बाहर से सुंदर, अंदर से दयनीय
स्थानीय निवासी अतुल यादव ने बताया कि हाल ही में रात को मेरी रसोई में बीम का हिस्सा टूट कर गिर गया। हैरानी की बात थी कि इसमें सरिया ही नहीं था। कोई बीम बिना सरिया के कैसे तैयार हो सकता है। इसे अलाट हुए चार ही साल हुए हैं और 20 साल बाद इसका क्या हाल होगा।
यहां 2400 परिवार रह रहे हैं, बाकी के फ्लैट की अभी अलाटमेंट होनी है। चार साल में ही यह भवन जर्जर हो गया है। यह बाहर से भले ही सुंदर दिखाई देता है, लेकिन अंदर की हालत दयनीय है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीडीए स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करता है और लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अपार्टमेंट में न सीवर व्यवस्था सही है और न ही फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहे हैं। वर्षा होने पर यहां सफेदी झड़ने लगती है, फर्श पर चलना मुशि्कल हो जाता है।
डीडीए समझ रहा है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लोग यहां रहते हैं, ये क्या शिकायत करेंगे। क्या सरकार को ईडब्ल्यूएस के लोगों की सुरक्षा की चिंता नहीं है। यहां जमीन के पानी का टीडीएस 1700 से 2500 है, लोगों को पानी की भी समस्या हो रही है।
महंगे भवनों में भी बुनियादी सुविधा नहीं है। निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही पर सवाल उठना लाजमी है।
कभी भी जानमाल का हो सकता है नुकसान
स्थानीय निवासी वीरेंद्र ने बताया कि रात को किचन में बीम गिरा है। यदि शाम को यह घटना होती तो महिला या बच्चा कोई भी चपेट में आ सकता था। सी-ब्लाक में यह घटना हुई है और सभी हैरान हैं। ऐसे ही एक बाथरूम में बीम गिरा, जिसमें सरिया ही नहीं था।
शिकायत पर डीडीए ने सर्वे कराने को कहा और मौके पर एक श्रमिक को भेज दिया। सीलन के लिए मैं स्वयं 200 लाेगों की शिकायत दे कर आया हूं। यहां अगि्नशमन यंत्र तक काम नहीं कर रहे हैं। रसाई, बाथरूम के फर्श धंस रहे हैं। लगता है रेत पर टाइल रखी गई थी।
सीलन की समस्या पाइपलाइन से हो रही है। आश्वासन मिला है कि एक-एक करके समस्या का समाधान कराएंगे। यहां कभी भी जानमाल का नुकसान हो सकता है। वहीं अनमोल राज सिंह ने बताया कि दस दिन पहले ही बाथरूम में मेरा बेटा नहा रहा था।
एकदम उस पर बीमा का प्लास्टर गिरा, गनीमत है कि वह बच गया। जब फ्लैट लिया तो डीडीए ने कहा कि नरेला में स्मार्ट सिटी बनाएंगे।
यहां 99 प्रतिशत फ्लैट में सीलन की समस्या शुरूआत से ही है। 200 से अधिक लोगों ने इसकी लिखित शिकायत डीडीए को दी है। हमने अपने लेटरहैड पर भी शिकायत दी है।
डीडीए एक-दूसरे पर बात डाल कर जिम्मेदारी से बचता है। यहां बीम में ही सरिया ही नहीं है। इसकी जांच होनी चाहिए। क्या डीडीए भवन के गिरने का इंतजार कर रहा है। - इंद्रेश कुमार सिंह, प्रधान, आरडब्ल्यूए
