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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दम तोड़ रही है व्यवस्थाएं

By JagranEdited By:
Published: Tue, 26 Dec 2017 08:18 PM (IST)

गांव : नंगली सकरावती आबादी : 10 हजार मतदाता : तीन हजार साक्षरता : 80 फीसद गांव सकरावती

दम तोड़ रही है व्यवस्थाएं
दम तोड़ रही है व्यवस्थाएं

गांव : नंगली सकरावती

आबादी : 10 हजार

मतदाता : तीन हजार

साक्षरता : 80 फीसद

गांव सकरावती जमीन का काफी हिस्सा 70 के दशक में सरकार द्वारा अधिग्रहित कर नजफगढ़ ड्रेन, नजफगढ़ मेट्रो डिपो, नंगली डेयरी बनाई गई। वर्तमान समय में गांव के तीन में से एक हिस्से में औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। आज तक औद्यौगिक क्षेत्र की मान्यता नहीं मिली। गंदे जल की निकासी का उचित इंतजाम नहीं होने से नालियों से लेकर नाले तक बंद पड़े हैं। डलाव की उचित व्यवस्था नहीं होने से गांव की मुख्य सड़कों से लेकर खाली प्लॉट तक कूड़ेदान बन गए हैं। हालत तो यह है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है ऐसे में गांव के लोगों की परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

ऐतिहासिक विशेषता :

नजफगढ़ और नजफगढ़ नाले के बीच नंगली सकरावती इकलौता गांव है, जिसमें साढ़े तीन हजार औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। आज इस गांव की सीमा नजफगढ़ रोड से ढिचाऊं बस डिपो तक बढ़ गई है। दिल्ली देहात व शहरी क्षेत्र को जोड़ने वाली नजफगढ़ रोड के किनारे यह गांव बसा है जो कभी गन्ने की खेती के लिए जानी जाती थी। गन्ने से गांव में ही तैयार कर शक्कर बनाया जाता था। इसी वजह से गांव को नंगली सकरावती नाम मिला। गांव में अब खेती की जगह उद्योग धंधों ने ले लिया है। गांव का इतिहास करीब 800 साल पुराना है। कभी ये लोग हरियाणा के नारीनारा गांव से आकर गांव ढिचाऊं में बसे थे। बताया जाता है कि नारीनारा गांव में दहिया गोला के जाटों की बहुसंख्य आबादी थी। एक दिन तेहलान गोला के मुखिया को गांव के नाई ने बताया कि दहिया गोला वाले आधी रात को हमला करने वाले हैं। तब तेहलान गोला वाले दिचाऊं आकर बस गए। जब गांव बसना शुरू हुआ था तब गांव में दादा राणा जी संत हुआ करते थे। इन्हें पीर बाबा भी कहा जाता था, जिस जगह पर बाबा रहते थे वहां आज दादा राणानाथ पीर जी मठ बना हुआ है। इस मठ को लोग दादा राणा जी का मंदिर नाम से जानते हैं। गांव के प्रवेश द्वार पर एक दक्षिणमुखी हनुमान का मंदिर है। यह श्रीराम के मंदिर से जाना जाता है।

मुख्य तीन समस्याएं

गंदे जल की निकासी की व्यवस्था नहीं

इलाके की सफाई के लिए सफाईकर्मियों की लंबी चौड़ी फौज है, लेकिन इसका दस फीसद भी कर्मचारी सफाई करने के लिए नहीं आते हैं। गांव की गलियों व नालियों की सफाई तभी होती है जब निगम के अधिकारियों का इस तरफ आना होता है। सीवर लाइन जाम पड़ी है, औद्योगिक इकाइयों से निकले तेजाबी पानी से गांव की नालियों से लेकर नाले तक भरी हुई हैं। निकासी नहीं होने की स्थिति में सड़कों पर पानी बहता रहता है। गांव में दो सरकारी स्कूल है जो इन इकाइयों के बीच स्थित है। इन स्कूल के बच्चों को इन्हीं गंदे रास्तों से निकलना पड़ता है। ढिचाऊं और नंगली सकरावती के रास्ते वाहन नजफगढ़ रोड पर निकलते रहते हैं ऐसे में ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

बिगड़ रही है गलियों की हालत

दो साल पहले गांव की गलियों की सड़कों की खोदाई कर सीवर लाइन व पानी की पाइप लाइन डाली गई थी। अभी भी पानी की पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है, लेकिन लाइन डालने के बाद इन्हें दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। ऐसे में रही सहीं दुरुस्त सड़कें भी टूटने लगी हैं। कॉलोनियों में दिन-रात धूल मिट्टी उड़ती रहती है। गांव में उद्योग धंधे लगे हैं, इसलिए बड़े-बड़े ट्रक-ट्राली भी आते हैं इसलिए सड़क बीच-बीच में धंस गई हैं। इसमें हर रोज कोई न कोई वाहन फंसता रहता है। नजफगढ़ में मेट्रो लाइन की वजह से अधिकांश छोटे वाहन इसी गांव से होते हुए नांगलोई की तरफ निकलते हैं। ऐसे में पूरे इलाके में धूल मिट्टी उड़ती रहती है। पूरा माहौल प्रदूषित हो गया है।

कूड़े से भरे है कूड़ेदान व खाली प्लॉट

विडंबना है कि निगम ने गांव के सामुदायिक केंद्र के सामने और श्रीराम मंदिर के पीछे डलावघर बनाया है। यहीं पर एक पार्क का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। इसी बीच से गांव की मुख्य सड़क ढिचाऊं की ओर निकलती है। आते जाते वाहन कूड़े को रौंदते रहते हैं। मंदिर व सामुदायिक भवन में आने जाने वाले परेशान तो पहले से ही थे अब पार्क का निर्माण होने के बाद गांव के बच्चे बुजुर्ग भी आएंगे ऐसे में परेशानी बढ़ जाएगी। गांव में अभी भी कई लोगों के खाली प्लॉट हैं, जिसमें कूड़े का ढेर पड़ा हुआ है।

कूड़ेदान से नियमित तौर पर कूड़ा नहीं उठता है। यह सड़कों पर फैलता रहता है। औद्योगिक इकाइयों से निकला कूड़ा खाली प्लॉट में डाला जाता है। ऐसे प्लॉटों की दीवारें भी ढहने लगी है।

पिछले कई साल से नालों में गंदा पानी भरा पड़ा है। एक साल पहले एक बार नाले की सफाई हुई थी इसके बाद पानी की कभा सफाई नहीं हुई। नाले का गंदा पानी इसी में सड़ता रहता है। नजफगढ़ ड्रेन से गांव की दूरी खास नहीं है। फिर भी नाले के गंदे पानी की निकासी नहीं हो रही है। इसलिए गांव की नालियां जाम रहती है। दिनोंदिन स्थिति बिगड़ रही है। इसकी वजह से सड़कें भी बर्बाद हो रही हैं।

कुलदीप

गांव की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को बार-बार शिकायत की जाती है फिर भी कोई सफाई करने को तैयार नहीं है। गांव की सफाई करने के लिए 50 से ज्यादा सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं, लेकिन उसमें से पांच ही काम करने के लिए आते हैं। शेष बैठकर वेतन लेते हैं। इसलिए सफाई व्यवस्था चौपट हो चुकी है। सड़कें व नालियां आज नहीं तो कल दुरुस्त हो जाएगी, लेकिन जहां तहां कूड़ा जमा होने से परेशानी बढ़ने लगी है।

मास्टर रामचंद्र

कॉलोनी की कुछ सड़कें बन गई है, कुछ का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन सड़क के किनारे बने नालों के ढक्कन बीच में गायब हो चुके हैं। इन नालियों में घरों का नहीं औद्योगिक इकाइयों से निकला गंदा पानी बहता रहता है। इसमें कभी बच्चे फंस जाते हैं कभी गाड़ियां। यह एक तरह से तेजाबी पानी है जो पैर में लगते ही खुजली होने लगती है। पैरों में जलन होने लगती है।

अमित पांडेय

वर्षो पहले चौपाल बना था। देखरेख के अभाव में यह दम तोड़ चुका है। बारिश के दौरान इसमें पानी टपकता है, लेकिन आज तक इसे दुरुस्त नहीं किया गया। इसकी नियमित सफाई नहीं होती । इसलिए गांव के लोग यहां पर नहीं बैठते। गांव के पशु इस चौपाल में घूमते रहते हैं। शादी समारोह का आयोजन का मौका आने पर लोगों को बैंक्वेट हाल में जाना पड़ता है।

योगेंद्र कुमार

गांव के नाम पर बैंक खोला गया, लेकिन अब गांव के बैंक को मेन रोड पर स्थानांतरित कर दिया गया। इसके लिए दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। गांव में एक भी एटीएम नहीं है ताकि जरूरत भर के पैसे निकाले जा सके। दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के आस पास दो पोल पर स्ट्रीट लाइट लगा दी गई, लेकिन इसमें से कोई नहीं जलती, इसलिए यहां भी अंधेरा छाया रहता है। रात के समय इस इलाके से आने जाने में भय लगता है। महिलाओं व बच्चों को गांव में निकलने में परेशानी होती है।

योगेश तहलान

जनप्रतिनिधियों का इस गांव से कोई लगाव नहीं रह गया है। सभी खानापूर्ति में लगे हैं। गांव के आस पास कॉलोनियों में बड़े-बड़े पार्क व झूले लगे हैं। गांव में छोटा सा पार्क बनाया जा रहा है इसका फुटपाथ इतना ऊंचा है, कि बुजुर्गो को उतरने चढ़ने में भी परेशानी होगी। टहलने के दौरान गिरने की भी संभावना बनी रहती है। अभी पार्क पूरी तरह से नहीं बना है अगर समय रहते इसे दुरुस्त करा दिया जाए तो बेहतर होगा।

अशोक कुमार

यह एक उभरता हुआ औद्योगिक क्षेत्र है। उद्योग धंधों को बर्बाद होते नहीं देखा जा सकता है। इस क्षेत्र को औद्योगिक दर्जा भी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। गांव के विकास के लिए करोड़ों की योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। नजफगढ़ रोड से गांव की तरफ आने जाने वाली सड़क एक साल पहले ही दुरुस्त कर दी गई थी। अधिकांश हिस्से में पानी की लाइन डाली जा चुकी है। इलाके की जो सड़कें दिल्ली सरकार के अधीन हैं उन्हें भी दुरुस्त करा दिया जाएगा। नाले की सफाई नियमित रूप से हो रही थी। दोबारा भी साफ कराने की जरूरत पड़ी तो सफाई कराई जाएगी।

गुलाब ¨सह, विधायक, मटियाला विधानसभा क्षेत्र

40 फुट की सड़क दिल्ली सरकार के पास है, इसके पास एक नाला है जो बाढ़ नियंत्रण विभाग का है। लोकनिर्माण का यह नाला बंद पड़ा है। जो सफाई का ठेका लेते हैं। वे पूरी तरह से काम नहीं करते हैं। निगम ने जितने भी कर्मचारी इस गांव के लिए दिए हैं सभी काम कर रहे हैं। गांव के बीच में कहीं की नालियां जाम नहीं हैं। पहले निगम ने कूड़ा उठाने के लिए ट्रैक्टर लगाए थे, निगम ने इनका भुगतान करना बंद कर दिया। फिर भी अपने खर्चे पर यह ट्रैक्टर चलवा रहे हैं। गांव के डलावघर से नियमित रूप से कूड़ा उठाया जाता है। प्लॉट में पड़े कूड़े को हटाना निगम का काम नहीं है।

संतोष शौकिन, निगम पार्षद, नंगली सकरावती