जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली : पूर्वी निगम के महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने सोमवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने पूर्वी निगम के मनोनीत पार्षदों के आचरण की शिकायत की और कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने उपराज्यपाल को बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में दिल्ली सरकार पर पूर्वी निगम का 246.16 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। पूर्वी निगम की आर्थिक हालत काफी खराब है। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए फंड नहीं है। ऐसे में उन्होंने दिल्ली सरकार से बकाया फंड दिलाने की मांग की।

इस मुलाकात के बाद निगम मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में महापौर ने कहा कि पूर्वी निगम विषम आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रहा है। दूसरी तिमाही तक दिल्ली सरकार ने निगम के फंड में 246 करोड़ रुपये की कटौती की है। इसकी वजह से त्योहार के समय में कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत आ रही है। इसके साथ उन्होंने कहा कि पिछले महीने सदन की बैठक में मनोनीत पार्षदों का व्यवहार अनुचित था। उन्होंने इसकी शिकायत उपराज्यपाल को की है। उन्हें एक पेन ड्राइव में मनोनीत पार्षदों के आचरण के सुबूत भी दिए हैं। दरअसल पिछली बैठक में हंगामे के दौरान कुछ मनोनीत पार्षदों ने कोरोना की शील्ड उखाड़ दी थी। महापौर ने अपनी शिकायत में आठ मनोनीत पार्षदों के नाम दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि संयुक्त निगम में मनोनीत पार्षदों की संख्या दस थी। अब तीन निगम हैं तो दस में से ही बंटवारा होना था, लेकिन हर निगम में इनकी संख्या दस हो गई है। उन्होंने इसकी जांच की मांग की है। श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने उपराज्यपाल को निगम में अवैध निर्माण के खेल में हो रहे भ्रष्टाचार से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के बजाय संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। महापौर ने मास्टर प्लान 2021 में रिहायशी क्षेत्रों में मीट की दुकानें खोले जाने की समस्या पर भी चर्चा की। इस दौरान मौजूद स्थायी समिति अध्यक्ष बीर सिंह पंवार ने कहा कि दिल्ली सरकार को निगम का बकाया फंड जल्द से जल्द जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के विकास के लिए दिल्ली सरकार सरकार को सहयोगपूर्ण रवैया अपनाने की जरूरत है। पद की गरिमा महापौर भूले: मनोज त्यागी पूर्वी निगम के नेता विपक्ष मनोज त्यागी ने महापौर द्वारा उपराज्यपाल से मिलकर मनोनीत पार्षदों की शिकायतें करने व उनकी संख्या को कम करने का सुझाव देने पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कर सीधे-सीधे उपराज्यपाल पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है जो अपने आप में शर्मनाक है। महापौर ने पूरे विपक्ष को निलंबित कर यह बता दिया है कि वह सदन चलाने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि निगम की सत्ता में बैठे भाजपा के नेता अपनी असफलताओं से बौखलाकर विपक्ष के खिलाफ उतर आए हैं। महापौर अपने पद की गरिमा को भूल गए हैं।

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