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Mansoon 2026: इस साल सूखे का खतरा मंडराया, जुलाई-सितंबर में होगी सबसे कम बारिश

Published: Tue, 07 Apr 2026 08:49 PM (IST)Updated: Tue, 07 Apr 2026 09:47 PM (IST)

स्काईमेट वेदर ने इस साल मानसून में सामान्य से कम वर्षा (एलपीए का 94%) होने का अनुमान लगाया है, जिसका ...और पढ़ें

स्काईमेट वेदर ने इस साल मानसून में सामान्य से कम वर्षा (एलपीए का 94%) होने का अनुमान लगाया है। इमेज एआई

स्काईमेट वेदर ने इस साल मानसून में सामान्य से कम वर्षा (एलपीए का 94%) होने का अनुमान लगाया है। इमेज एआई

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। एक के बाद एक आ रहे पश्चिमी विक्षोभों के असर से भले ही इस वर्ष मार्च के बाद अप्रैल में भी देश के कई हिस्सों में झमाझम वर्षा हो रही हो। लेकिन निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने कहा कि इस साल मानसून में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जो लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 94 प्रतिशत होगी।

इसकी बड़ी वजह अल नीनो को माना जा रहा है, जिसका असर वर्षा पर पड़ सकता है। स्काईमेट का कहना है कि मानसून के चार माह में देशभर में औसतन 817 मिमी वर्षा हो सकती है। हालांकि इसमें पांच प्रतिशत तक ऊपर या नीचे रहने की गुंजाइश भी बताई गई है।

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एजेंसी ने यह भी कहा है कि इस साल देश में सूखे की आशंका करीब 30 प्रतिशत तक है, जबकि 40 प्रतिशत संभावना ऐसी है कि वर्षा सामान्य से कम ही रहे। एजेंसी के अनुसार जून (101 प्रतिशत) में शुरुआत अच्छी होगी, लेकिन जुलाई (95 प्रतिशत), अगस्त (92 प्रतिशत) और सितंबर (89 प्रतिशत) में ग्राफ गिरता जाएगा।

स्काईमेट के अनुसार पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में सूखे की 30 प्रतिशत आशंका है जबकि पूर्वी भारत में स्थिति बेहतर रहेगी। यह पूर्वानुमान कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि अगस्त-सितंबर की कमी फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकती है।

अल नीनो की वापसी कमजोर मानसून का संकेत

स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह के मुताबिक पिछले डेढ़ साल से सक्रिय ''ला नीना'' की स्थिति अब खत्म हो रही है। प्रशांत महासागर अब ''ईएनएसओ-न्यूट्रल'' की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के शुरुआती चरण में ''अल नीनो'' के विकसित होने की संभावना है, जो सीजन के दूसरे भाग में और मजबूत हो सकता है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है, वर्षा के वितरण में अनियमितता देखने को मिल सकती है।

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