विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट साझा करना कोई अपराध नहीं, दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में मनीष सिसोदिया की दलील
राऊज एवेन्यू कोर्ट में दिल्ली आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की ओर से दलीलें पेश की गईं। बचाव पक्ष ...और पढ़ें
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मनीष सिसोदिया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राऊज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत में दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े सीबीआई मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से आरोप तय किए जाने के बिंदु पर दलीलें सुनी गईं।
सिसोदिया की ओर से पेश वकील विवेक जैन ने दलील दी कि आबकारी नीति पर सुझाव लेने के लिए विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट साझा करने में किसी प्रकार का कोई अपराध नहीं है और इस आधार पर उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। यह भी दलील दी गई कि नई नीति का विरोध पुराने शराब विक्रेताओं की लाबी कर रही थी।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने सिसोदिया की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अगली सुनवाई पर सह-आरोपित पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आरोपों पर दलीलें सुनेंगे। इससे पहले वरिष्ठ वकील रेबेका जाॅन ने सिसोदिया की ओर से तर्क रखा था।
रेबेका जाॅन ने दलील दी थी कि नीति निर्माण के दौरान प्राप्त 4600 ई-मेल सुझावों में से केवल छह ई-मेल जाकिर खान के प्रशिक्षु द्वारा भेजे गए थे। जाकिर खान उस समय दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि मात्र छह ई-मेल के आधार पर किसी नीति के गठन का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि मनीष सिसोदिया ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट जाकिर खान को केवल सुझाव देने के लिए भेजी थी। इसमें कोई अपराध नहीं है। यह रिपोर्ट पहले से ही आबकारी विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी। अपनी दलीलों के दौरान वरिष्ठ वकील रेबेका जान ने अरविंद के बयान, रवि धवन की रिपोर्ट, तत्कालीन आबकारी आयुक्त राहुल सिंह की नोटिंग और तत्कालीन आबकारी आयुक्त संजय गोयल के बयान का भी हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि राहुल सिंह के नोट में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, केजी बालकृष्णन और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी के सुझाव शामिल थे। रेबेका जाॅन ने दलील दी कि पुराने रिटेलर्स के संघ की ओर से भी एक ईमेल भेजा गया था, जिसमें पुरानी आबकारी नीति को ही जारी रखने की मांग की गई थी। उन्होंने दलील दी कि मनीष सिसोदिया ने राहुल सिंह से कहा था कि जनता से प्राप्त सुझावों को शामिल करते हुए एक नई कैबिनेट नोट दाखिल की जाए।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि एक कानूनी नोट इच्छुक पक्षों को दिया गया था, लेकिन वह आबकारी विभाग की आधिकारिक ईमेल आईडी से नहीं भेजा गया था। उस नोट में भी पुरानी नीति की यथास्थिति बनाए रखने का ही सुझाव दिया गया था। रेबेका जान ने तर्क दिया कि लाबी का उद्देश्य ही पुरानी नीति को बनाए रखना था।
रेबेका जाॅन ने दलील दी कि विजय नायर, कैलाश गहलोत के सरकारी आवास में रहते थे और उनका घर उसी इलाके में था, जहां एक ही मोबाइल टावर कार्यरत था, जिससे लोकेशन से जुड़े आरोप भ्रामक हैं। उन्होंने 36 पन्नों का प्रिंटआउट साझा किए जाने के आरोपों को भी निराधार बताया और कहा कि न तो उसकी कोई भौतिक बरामदगी हुई और न ही यह पता है कि उसे किसने प्रिंट किया।
