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'ज्ञानेश कुमार पर चले मुकदमा', CEC के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में महुआ मोइत्रा ने दी शिकायत

Published: Thu, 24 Sep 2026 04:24 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 04:26 PM (IST)

महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली पार्लियामेंट थाने में शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया ...और पढ़ें

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा।

HighLights

  1. महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

  2. ज्ञानेश कुमार पर अन्य EC की सहमति के बिना काम करने का आरोप।

  3. असली वोटरों को मतदान करने से रोकने का आरोप लगाया गया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा दिल्ली पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पहुंची हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी है।

महुआ मोइत्रा ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट डालकर लिखा कि ज्ञानेश कुमार एक एजेंट है। महुआ मोइत्रा ने कहा कि असली वोटरों को वोट देने से रोकना ऑफिशियल ड्यूटी नहीं है।

ये सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं

वे कहती हैं कि ये सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं हैं। चुनाव आयोग एक समूह के रूप में काम करता है। मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले अपने दोनों साथियों की आपत्ति के बावजूद आयोग के नाम पर फैसला या दस्तावेज जारी नहीं कर सकते।

आधिकारिक कर्तव्य का उल्लंघन

महुआ मोइत्रा कहती हैं कि ऐसा करना जालसाजी, झूठा दस्तावेज और आधिकारिक कर्तव्य का उल्लंघन है।वोटर लिस्ट एक सार्वजनिक रजिस्टर है। जानबूझकर गलत एंट्री करना जालसाजी और Representation of the People Act के तहत अपराध है। सार्वजनिक धन का गलत इस्तेमाल करके पात्र मतदाताओं को हटाना आपराधिक ट्रस्ट ब्रेच है।

2023 के कानून की धारा 16 (इम्यूनिटी) सिर्फ आधिकारिक कर्तव्य के तहत किए गए काम पर लागू होती है। पात्र मतदाताओं को हटाना, रजिस्टर में जालसाजी और बिना अधिकार के पत्र जारी करना आधिकारिक कर्तव्य नहीं है, इसलिए इम्यूनिटी नहीं मिल सकती।

महुआ मोइत्रा ने कहा, 'संज्ञान लेने योग्य अपराधों की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के रूप में यह पत्र लिख रही हूं, ताकि आपके समक्ष ऐसे तथ्य रख सकूं, जिनके आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करना आवश्यक है।' 

2025 में संभाला था पद

उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इसके तुरंत बाद 24 जून 2025 के अपने आदेश द्वारा भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का निर्देश दिया।

महुआ मोइत्रा के अनुसार, आदेशों के माध्यम से इस प्रक्रिया को पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी बढ़ा दिया गया। व्यापक रूप से यह रिपोर्ट किया गया है कि इस प्रक्रिया के दौरान प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची से 1.5 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं।   

इंडियन एक्सप्रेस के 23 अक्टूबर 2026 के मुख्य पृष्ठ से अब यह खुलासा हुआ है कि ऐसा कैसे हुआ? रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई अवसरों पर उनकी जानकारी के बिना लिए जा रहे निर्णयों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।

आयोग से उनकी सलाह के विपरीत कार्य कराया जा रहा था, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और शासी कानून के खिलाफ है। आयोग के भीतर कार्यों के आवंटन में इस तरह बदलाव किया गया ताकि मतदाता सूची से उनका पर्यवेक्षण हटाया जा सके।

क्या हैं मांगें?

  • तुरंत FIR दर्ज की जाए
  • संबंधित फाइलें, नोटशीट, मिनट्स, ई-ऑफिस रिकॉर्ड, डिलीशन लॉग्स, फंड के रिकॉर्ड आदि सुरक्षित किए जाएं
  • गवाहों (खासकर बाकी दो चुनाव आयुक्तों) से पूछताछ हो
  • FIR की कॉपी मुफ्त दी जाए