जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : बच्ची की कस्टडी को लेकर चल रहे एक मामले ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। बुधवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में जानकारी दी कि ढाई साल की बच्ची को उसका पिता पश्चिम बंगाल ले गया था और वहां से टैक्सी से नेपाल भाग गया, जबकि बच्ची को विदेश ले जाने से रोकने के लिए उसका पासपोर्ट अदालत में जमा करा लिया गया था। इस पर न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने उक्त व्यक्ति की मां, बहन समेत अन्य के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करने का आदेश दिया, ताकि वे विदेश यात्रा नहीं कर सकें। पीठ ने कहा कि प्राथमिक तौर पर यह पिता द्वारा अपने ही बच्चे के अपहरण का मामला है। ऐसे में तत्काल एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए।

पीठ ने मामले में गृह मंत्रालय को भी पक्षकार बनाते हुए कहा कि मंत्रालय उक्त व्यक्ति के पासपोर्ट को रद करने का आदेश जारी करे। पीठ ने मंत्रालय से जवाब मांगते हुए सुनवाई को पांच सितंबर के लिए स्थगित कर दिया। अदालत ने दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार निवासी उक्त व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश दिया। बच्ची की मां की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है। अदालत ने इससे पहले महिला को बच्ची की कस्टडी दी थी। महिला ने याचिका दायर कर बच्ची की सुरक्षा की मांग की थी, क्योंकि उसके पति ने 24 अगस्त तक उसे वापस नहीं किया था।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से स्टैंडिग काउंसल (अपराध) राहुल मेहरा ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल की। उन्होंने बताया कि बच्ची के पिता के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया जा चुका है। उसकी मां, बहन व नौकर से पूछताछ की गई है, लेकिन वे सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस पर पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला है, जहां लोग समझते हैं कि वे रुपये से कुछ भी खरीद सकते हैं। यह संदेश उक्त व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए कि उसने गलती की है। यह ऐसा मामला है, जिसमें किसी ने कोर्ट में दिए गए वक्तव्य को झुठलाया है। यह समझना होगा कि कोई भी अदालत का मजाक नहीं बना सकता। यह सिर्फ रुपया है जो उक्त व्यक्ति की मदद कर रहा है।

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यह है मामला

महिला ने अदालत को बताया कि वर्ष 2017 में उसके ससुर उसकी बच्ची को बैंकॉक और और वहां से दुबई स्थित घर पर ले गए थे। जब वह दुबई गई तो उन्हें बच्ची से मिलने नहीं दिया गया। कोर्ट जाने पर बच्ची को दिल्ली लाया गया। अदालत ने माता-पिता को बच्ची की अंतरिम कस्टडी देते हुए मुलाकात की व्यवस्था व शर्तो का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया था। पीठ ने यह भी कहा था कि अगर दोनों में से किसी ने भी इसका अनुपालन नहीं किया तो अदालत व्यवस्था पर पुनर्विचार करेगी।

Posted By: Jagran

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