नई दिल्ली, जेएनएन। फिरौती के लिए युवक का अपहरण कर हत्या करने के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को हाइकोर्ट ने बरकरार रखते हुए आरोपित की प्राकृतिक मौत होने तक कारावास की सजा सुनाई है। 15 साल पहले हुई घटना के मामले में सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर व न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने कहा कि दोषी जोगिंदर व विकास चौधरी सजा से 30 साल तक पैरोल पाने के हकदार नहीं होंगे।

एक को म‍िला संदेह का
हालांकि, पीठ ने मामले में तीसरे आरोपित विकास सिद्धू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। निचली अदालत के फैसले को तीनों आरोपितों ने हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर व न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने कहा कि दोषी जोगिंदर व विकास चौधरी के खिलाफ पुख्ता सुबूत सामने आए हैं, जबकि विकास सिद्धू के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं है।

अपहरण के बाद मर्डर
पीठ ने कहा कि जोगिंदर व विकास चौधरी ने फिरौती के लिए 20 वर्षीय प्रकाश चड्ढा का अपहरण किया और हत्या कर दी थी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जलाकर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हि‍ंडन नदी में फेंक दिया था।

चार लाख का अर्थदंड
पीठ ने निचली अदालत द्वारा जोगिंदर व विकास चौधरी पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा देने के दंड को भी बरकरार रखा। याचिका के अनुसार, 18 जनवरी 2003 को अशोक विकास स्थित आवास से प्रकाश चढ्डा का विकास चौधरी और जोगिंदर ने अपहरण कर लिया और फिरौती के रूप में 35 लाख रुपये मांगे। आरोपितों ने उसी रात में प्रकाश की हत्या कर शव को जला दिया था।