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हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद कैब ड्राइवर बनीं दिल्ली की लक्ष्मी देवी, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में किया जिक्र

Published: Sun, 22 Feb 2026 08:21 PM (IST)

विश्वास नगर की लक्ष्मी देवी ने हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद कैब ड्राइवर बनकर परिवार का सहारा बनीं। उनका दिल केवल ...और पढ़ें

कैब ड्राइवर लक्ष्मी देवी अपनी बेटियों के साथ। फोटो- जागरण

कैब ड्राइवर लक्ष्मी देवी अपनी बेटियों के साथ। फोटो- जागरण 

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शुजाउद्दीन, पूर्वी दिल्ली। देश में अंगदान को महादान यूं ही नहीं कहा गया है। जान गंवाने के बाद भी व्यक्ति कई लोगों को जीवनदान दे सकता है। विश्वास नगर में रहने वाली एक समान्य परिवार की लक्ष्मी देवी का दिल 15 प्रतिशत ही काम कर रहा था।

आरएमएल अस्पताल में उनका हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ। मानों लक्ष्मी को नया जीवन मिल गया हो। हार्ट ट्रांसप्लांट होने के बाद लक्ष्मी एक घरेलू महिला से कैब ड्राइवर बन गई। परिवार के लिए उन्होंने कैब का स्टीयरिंग थामा। रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने "मन की बात' कार्यक्रम में लक्ष्मी के ट्रांसप्लांट का जिक्र किया।

कौन हैं कैब ड्राइवर लक्ष्मी देवी?

दिल्ली में महिला कैब ड्राइवर बहुत कम हैं। उन महिला ड्राइवरों में लक्ष्मी भी शामिल हैं। लक्ष्मी के परिवार में पति शाह, तीन बेटियां दीक्षा, कशिश व कनिष्का हैं। पति पेशे से ई-रिक्शा ड्राइवर हैं और तीना बेटियां स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं।

वर्ष 2012 में लक्ष्मी की शादी हुई थी। वह एक घरेलू महिला थीं। वर्ष 2020 से उनके दिल ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। वर्ष 2022 में उनका दिल 15 प्रतिशित का काम कर रहा था। उनका इलाज आरएमएल अस्पताल में चला।

सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक युवक का दिल उन्हें ट्रांसप्लांट किया गया। उसके बाद उन्हें नया जीवन मिला। हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद जीवन बदल गया। इलाज से पहले थोड़ी दूर चलने पर सांस फूल जाता, लेकिने ट्रांसप्लांट के बाद केदारनाथ में 14 किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़ी। उन्होंने कहा कि अगर उनका ट्रांसप्लांट न होता तो शायद वह जीवित नहीं रह पाती। उन्होंने अपील की सभी को अंगदान का संकल्प लेना चाहिए।

दस से 12 घंटे चलाती हैं कैब

लक्ष्मी का जीवन बहुत चुनौतीपूर्ण रहा है। लक्ष्मी ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। शादी के बाद तीन बेटियां हुईं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। दिल ने भी काम करना लगभग बंद कर दिया। हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ, लेकिन इलाज व दवा की वजह से आर्थिक स्थिति बिगड़ी चली गई।

दो वर्ष पहले लक्ष्मी ने कार चलानी सीखी। इसके बाद उन्होंने लोन पर एक कार खरीदी। वह ओला, उबर के लिए कैब चलाती हैं। लक्ष्मी ने बताया कि वह 10 से 12 घंटे रोज दो सौ किलोमीटर कैब चलाती हैं। रोजाना एक से दो हजार रुपये के बीच कमाती हैं। सुबह ड्यूटी पर निकलने से पहले वह घर के काम निपटाती हैं और बच्चियों को स्कूल छोड़ती हैं।

पीएम से की अपील, अस्पताल में मिलनी चाहिए दवा

पीएम के मन की बात की लक्ष्मी ने सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने पीएम से एक अपील की। उन्होंने कहा आरएमएल अस्पताल सरकारी है। उनका इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है। जीवनभर उन्हें हार्ट की दवा खानी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आरएमएल अस्पताल में जब भी वह जाती हैं, दवा नहीं मिलती है। बाजार से उन्हें दवा खरीदनी पड़ती है। हार्ट की दवा बाजार में बहुत महंगी मिलती है। कैब की कमाई लोन व दवा खरीदने में खर्च हो जाती है। अस्पताल से दवा मिलेगी तो बेहतर होगा।