सुधीर कुमार, पूर्वी दिल्ली

घोंडा गुजरान और सोनिया विहार में लैंडफिल साइट का हर स्तर पर विरोध हो रहा है। पर्यावरणविद् एवं जल विशेषज्ञ जहां इसे जीवनदायिनी यमुना के लिए खतरा बता रहे हैं, वहीं इलाके के लोग भी इसके विरोध में लगातार बैठक कर एकजुटता बनाने में जुटे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर व्यापक पैमाने पर विरोध किया जा सके। इन लोगों का कहना है कि यह काफी सघन इलाका है। लैंडफिल साइट बनने से यहां की आबादी मुसीबतों से घिर जाएगी। इस मुद्दे को लेकर विधायक कपिल मिश्रा भी मुखर हैं। उन्होंने इन जगहों पर लैंडफिल साइट का प्रस्ताव बनाने वाले निगम व अन्य विभागों के फैसले को एनजीटी में चुनौती भी दी है।

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यमुना खादर क्षेत्र में लैंडफिल साइट बनाना किसी रूप में ठीक नहीं है। यह इलाका ओ जोन में आता है, जहां निर्माण पर पाबंदी है। आसपास पार्क नहीं होने के कारण लोग खादर क्षेत्र में ही सैर करते हैं। डीडीए लोगों को यहां खेती करने तक से मना करता है तो लैंडफिल साइट के लिए जगह कैसे दे दी।

बिजेंद्र प्रधान, गांवड़ी गांव, घोंडा

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यह निर्णय लोगों का दम घोंटने के बराबर है। कूड़े के कारण लोग बीमारियों से ग्रस्त होंगे और असमय मौत होगी। जब हर स्तर पर विरोध हो रहा है तो नगर निगम और डीडीए को सोचना चाहिए, वरना यहां के लोग अपनी जान की हिफाजत के लिए हर हाल में काम रुकवाएंगे।

करतार ¨सह डेढा, गढ़ी मेंडू गांव, घोंडा गुजरान

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सोनिया विहार में जहां लैंडफिल साइट प्रस्तावित है, वह क्षेत्र पेड़ों से आच्छादित है। यहां कई विलुप्तप्राय प्राणी रहते हैं। यहां निर्माण होने से उन पर खतरा आ जाएगा और सोनिया विहार के पास यमुना में अभी जो पानी साफ है, वह भी जहरीला हो जाएगा। इससे लाखों की आबादी संकट में आ जाएगी।

अनुपम पांडेय, प्रधान, सोनिया विहार तीसरा पुश्ता मार्केट एसोसिएशन

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मेरे घर से कुछ ही दूरी पर लैंडफिल साइट बनाने का प्रस्ताव है। यहां के लोग कंक्रीट के जंगल में रहते हैं। सघन आबादी है और लोग सुकून के लिए यमुना किनारे ही जाते हैं। अगर यहां कचरे का पहाड़ बना दिया जाएगा तो यमुना किनारे जाना तो दूर, घरों में भी रहना मुश्किल हो जाएगा।

देवी शरण शुक्ला, निवासी, डी ब्लॉक सोनिया विहार

Posted By: Jagran