6 दशक पुराना जल विवाद होगा खत्म, हरियाणा सहित छह राज्यों के बीच आज दिल्ली में होगा समझौता
आज नई दिल्ली में किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच जल वितरण समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, जिससे छह दशक पुराना अंतरराज्यीय जल विवाद समाप्त हो जाएगा।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
HighLights
छह दशक पुराना अंतरराज्यीय जल विवाद आज होगा समाप्त।
किसाऊ बांध परियोजना पर छह राज्यों में जल समझौता।
हरियाणा, यूपी, राजस्थान, दिल्ली को मिलेगा टोंस नदी का पानी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, नई दिल्ली। करीब छह दशक से लंबित अंतरराज्यीय जल विवाद के समाधान की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच जल वितरण समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
इससे पहले पंद्रह जून को हुई बैठक में सभी राज्यों के बीच सहमति बन चुकी थी। अब केवल समझौते पत्र पर हस्ताक्षर करने हैं। बैठक नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में सुबह 11:30 से होगी।
जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा शर्मा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह , राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा तथा सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे।
समझौते पर हस्ताक्षर के साथ 6 दशक पुरानी समस्या होगी खत्म
इससे पूर्व हुई बैठक में सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री जल वितरण के प्रस्ताव पर सहमत हो चुके हैं। अब समझौते पर हस्ताक्षर के साथ करीब छह दशक से अटकी इस परियोजना पर काम तेजी से आरंभ होगा।
लंबे समय तक परियोजना के अटके रहने से इसकी लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। अब इसकी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह रकम आधी थी।
ऐसे में छह राज्यों के बीच समझौता होने से परियोजना को संस्थागत आधार मिलने के साथ इसके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
बहुउद्देशीय परियोजना से होंगे ये फायदे
टोंस नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ राज्यों के बीच सहयोग की नई राह भी खोल सकती है। परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है।
वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है।
