नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। कृषि कानूनों के विरोध में बीते 47 दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर कानूनों की प्रतियां जलाई। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म नहीं किया है। उनकी मांग है कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं ले लिए जाते हैं वो तब तक अपना धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। उधर देर शाम को किसानों ने यूपी गेट पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान भी तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज करवाया। 

मालूम हो कि बीते 47 दिनों से दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर, यूपी दिल्ली के यूपी गेट बॉर्डर पर किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है। यहां किसानों ने अपने सैकड़ों टेंट लगा लिए हैं और यहीं पर बैठे हुए हैं। सरकार के साथ किसानों की 8 दौर की वार्ता हो चुकी है मगर उसके बाद भी कोई हल नहीं निकला है। किसान किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं है।

उनकी खाली एक ही मांग है कि सरकार अपने तीनों कृषि कानून वापस ले लें बस। सरकार हर बार किसानों से कह रही है कि ये कानून उनके फायदे के लिए बनाए गए हैं मगर किसान मानने को तैयार नहीं है। इस बीच सरकार ने ये भी कहा कि किसान दूसरों के बरगलाने में न फंसे, सरकार उनके फायदे के लिए सोच रही है ना कि नुकसान के लिए। इन सबके बाद भी किसान सरकार की बात मानने को तैयार नहीं है। 

इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक कमेटी का भी गठन कर दिया, इस कमेटी पर भी किसानों के संगठन ने उंगली उठा दी है। उनका कहना है कि कमेटी में कोर्ट ने जिन लोगों को शामिल किया है वो इस कानून की अच्छाइयां गिना चुके हैं, इस वजह से वो उनके हित के लिए बात नहीं करेंगे। सरकार के हित के लिए सोचेंगे। कुछ संगठनों ने तो इस कमेटी के सामने अपनी बात ही रखने से मना कर दिया है जबकि कुछ संगठन अपनी बातों को रखने के लिए मान गए हैं। इस मामले में अब अगली सुनवाई 16 जनवरी को होनी है।

 

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