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मानसून में जानलेवा बनी लापरवाही: रोहिणी से नांगलोई जाने वाले नाले की दीवार गायब, हजारों परिवारों की बढ़ी चिंता

Published: Tue, 08 Sep 2026 07:55 PM (GMT+05:30)

बाहरी दिल्ली के किराड़ी में बड़े नाले पर सुरक्षा दीवारें न होने से हादसों का खतरा बना हुआ है, जो ...और पढ़ें

किराड़ी में हादसों को न्योता देता खुला नाला

किराड़ी में हादसों को न्योता देता खुला नाला

HighLights

  1. किराड़ी नाले पर सुरक्षा दीवारें न होने से हादसे की आशंका।

  2. रिहायशी क्षेत्रों के बीच से गुजरता नाला, लोगों को खतरा।

  3. खुले नाले से बदबू, मच्छर और बीमारियों का प्रकोप बढ़ता।

संवाद सहयोगी, बाहरी दिल्ली। किराड़ी में बड़े नाले पर जगह-जगह से सुरक्षा दीवार न होने के कारण हादसे की आशंका बनी हुई है। रिहायशी क्षेत्रों के बीच से गुजर रहे इस नाले पर कई जगहों पर दीवार टूटी हुई है, तो कई जगहों पर दीवार की ऊंचाई केवल इतनी है कि कोई भी व्यक्ति नाले में गिर सकता है।

रोहिणी सेक्टर-22 से नांगलोई की ओर गुजरने वाले इस नाले पर कई वर्षों से सुरक्षा दीवार नहीं है। नाले के आसपास लगभग एक हजार से अधिक घर बने हुए है।

इनमें रहने वाले लोग अपने कामकाज के लिए नाले के नजदीक से गुजरते है। कई स्थानों पर नाले के साथ-साथ सड़क मार्ग है। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

जलनिकासी का माध्यम है नाला

प्रेम नगर, गौरव नगर, नीति विहार व प्रताप विहार के बीच से गुजरता दो-तीन किलोमीटर का यह नाला क्षेत्र की जलनिकासी का माध्यम है। वर्षों पूर्व नाले पर बनाई गई दीवार केवल दो से ढाई फीट तक रह गई।

अधिकतर स्थानों पर दीवार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। नतीजतन लगभग 10 फीट चौड़ा व छह अधिक गहरे इस नाले में किसी के गिरने के बाद किसी का बचना मुश्किल है। बावजूद इसके नाले पर सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं किया जा रहा।

नाला खुला होने के कारण बदबू और मच्छरों की भरमार रहती है। आसपास का वातावरण दूषित होने के साथ ही बीमारी का डर भी बना रहता है।

जलभराव के वक्त नहीं दिखाई देता नाला

मानसून की वर्षा के दौरान नाले का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों व घरों तक पहुंचता है और जलभराव के बीच नाले नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे में हादसे व बीमारी की आशंका और बढ़ जाती है।

प्रेम नगर निवासी राहुल ने बताया कि नाले की दीवार न होने के कारण कई बार बच्चे गिरते-गिरते बचते है। कई बार वाहन और पशु गिर चुके है।

खुले नाले होने के कारण बदबू और मच्छरों की भरमार रहती है। जो बीमारी का कारण बनते है। मानसून में स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है।

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