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मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ शिकायत खारिज होने पर पुनरीक्षण याचिका पर कोर्ट का नोटिस,  27 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

Published: Fri, 30 Jan 2026 05:33 PM (IST)

राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ शिकायत खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण ...और पढ़ें

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और खड़गे को 27 फरवरी को अगली सुनवाई के लिए बुलाया गया है। फाइल फोटो

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और खड़गे को 27 फरवरी को अगली सुनवाई के लिए बुलाया गया है। फाइल फोटो

HighLights

  1. खड़गे के खिलाफ शिकायत खारिज होने पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया।

  2. दिल्ली पुलिस और खड़गे को 27 फरवरी को तलब किया।

  3. नफरत भरे भाषण की शिकायत खारिज होने को चुनौती दी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल जज की कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने इस मामले में दिल्ली पुलिस और मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी किया।

अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है। कोर्ट ने अगली तारीख से पहले ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड भी तलब किया है। यह रिवीजन याचिका वकील रविंद्र गुप्ता ने दायर की है, जिसमें 11 नवंबर, 2025 के तीस हजारी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। इस आदेश में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया था और मामले का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। रिवीजन याचिका में वकील गगन गांधी ने रविंद्र गुप्ता का प्रतिनिधित्व किया।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नारेगल में एक चुनावी रैली के दौरान नफरत भरा भाषण दिया था। शिकायतकर्ता रविंद्र गुप्ता, जो कथित तौर पर RSS के सदस्य हैं, ने दावा किया कि खड़गे के बयान से उन्हें और उनके संगठन को ठेस पहुंची है।

हालांकि, 11 नवंबर, 2025 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास प्रीति राजोरिया ने शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि खड़गे का बयान किसी खास समुदाय, धर्म, जाति या जातीय समूह को निशाना नहीं बनाता है। कोर्ट ने साफ किया कि यह बयान राजनीतिक और वैचारिक आलोचना के दायरे में आता है और न तो किसी समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काता है और न ही किसी तरह की हिंसा को उकसाता है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सिर्फ कड़ी या तीखी आलोचना को नफरत भरा भाषण नहीं माना जा सकता, जब तक कि दो समूहों के बीच नफरत या सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने का साफ इरादा न हो। मजिस्ट्रेट ने यह भी माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत IPC की धारा 500 के तहत मानहानि का अपराध पहली नजर में नहीं बनाते हैं।

मानहानि के आरोप पर, कोर्ट ने कहा था कि मामले का संज्ञान लेना कानूनी रूप से वर्जित था क्योंकि शिकायत खुद पीड़ित पक्ष, यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दायर नहीं की थी।