'मेरे बयान को काटकर पेश किया गया', JNU कुलगुरु ने दलित टिप्पणी विवाद पर दी सफाई
जेएनयू की कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित ने दलितों और अश्वेतों संबंधी अपनी टिप्पणी पर उठे विवाद पर स्पष्टीकरण दिया है। ...और पढ़ें

जेएनयू की कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित। (फाइल फोटो)

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित ने दलितों और अश्वेतों संबंधी अपनी हालिया टिप्पणी पर उठे विवाद के बीच स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उनके बयान को राजनीतिक उद्देश्य से संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया।
कुलगुरु ने कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों ने उनका समर्थन किया है और आरोप लगाया कि जेएनयू शिक्षक संघ व छात्रसंघ परिसर में विचार-विमर्श की स्वस्थ परंपरा को चयनात्मक प्रस्तुति से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कोई भी समुदाय स्थायी रूप से पीड़ित मानसिकता रखकर प्रगति नहीं कर सकता, जिस पर छात्र संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई।
कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि पहचान की राजनीति पर टिप्पणी था। उन्होंने कहा कि वे समानता के पक्ष में हैं और जन्म-आधारित पहचान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव या दंड का समर्थन नहीं करतीं।
उन्होंने भीमराव आंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि वे भी असमान कानून के पक्ष में नहीं होते। कुलगुरु ने कहा कि पूरा पाडकास्ट लगभग 55 मिनट का है और विवादित हिस्सा अंत का छोटा अंश है, जिसे गलत तरीके से प्रसारित किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ सामाजिक चिंतकों, जैसे विवेक कुमार ने भी उनके बयान को सही संदर्भ में समझा है।
