जेएनयू परिसर में बिना चेकिंग गाड़ियों की एंट्री पर रोक, ANPR-CCTV कैमरे से रहेगी हर गतिविधि पर नजर
जेएनयू परिसर में सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रमुख प्रवेश ...और पढ़ें

जेएनयू परिसर में सुरक्षा कड़ी होगी। फाइल फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

समय कम है?
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लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल के वर्षों में सामने आई सुरक्षा चुनौतियों और बाहरी हस्तक्षेप की घटनाओं के मद्देनजर अब परिसर की निगरानी व्यवस्था को तकनीक के माध्यम से और सुदृढ़ किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल नजर रखी जा सकेगी। वाहन किस उद्देश्य से परिसर में आया है, कितने समय तक रुका और कब बाहर निकला इन सभी जानकारियों को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। इसको लेकर टेंडर जारी किया गया। जिसके जेएनयू के मुख्य गेटों पर प्रमुखता से नजर रखने की योजना बनाई जा रही है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेएनयू परिसर में छात्रों को निजी वाहन लाने और परिसर के भीतर पार्किंग की अनुमति नहीं है। यदि कोई छात्र या अन्य व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी को असुविधा पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा और परिसर की शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सुरक्षा के लिए क्या-क्या होंगे इंतजाम?
इसके साथ ही विश्वविद्यालय के छह मुख्य द्वारों पर 11 से अधिक नए हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, 11 बूम बैरियर, 5 वर्कस्टेशन पीसी और 5 नेटवर्क स्विच बनाए जाने की योजना बनाई जा रही है। ये कैमरे 24 घंटे निगरानी में रहेंगे और कंट्रोल रूम से सीधे जुड़े होंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
दरअसल, बीते कुछ वर्षों में जेएनयू में कई बार हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें बाहरी लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हाल ही में नर्मदा और ताप्ती हास्टल के छात्रों के बीच हुए विवाद ने संघर्ष का रूप ले लिया था, जिसमें बाहरी लोगों के शामिल होने की भी चर्चा रही। पुलिस मौके पर पहुंची थी, हालांकि औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई।
इससे पहले अक्टूबर 2025 में स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में छात्रों के दो गुटों के बीच मारपीट की घटना में कई छात्र घायल हुए थे। वहीं जनवरी 2020 की घटना, जब नकाबपोश हमलावरों ने परिसर में घुसकर छात्रों पर हमला किया था, आज भी जेएनयू के इतिहास में एक गंभीर सुरक्षा चूक के रूप में याद की जाती है।
प्रशासन का कहना है कि नई तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकना और जेएनयू को सुरक्षित शैक्षणिक परिसर के रूप में बनाए रखना है, जहां छात्र बिना भय के अध्ययन और शोध कर सकें।
