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    जागरण-डिजीकवच अभियान: दिल्‍ली के वरिष्‍ठ नागरिकों ने सीखे डिजिटल सेफ्टी के तरीके

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 05:33 PM (IST)

    दिल्ली में जागरण और विश्वास न्यूज़ के सहयोग से गूगल ने 'डिजीकवच' कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने ऑनलाइन स्कैम से बचने के तरीके बताए, जैसे कि मजबूत पासवर्ड बनाना और फिशिंग लिंक्स से दूर रहना। 'वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा' अभियान के तहत देश के कई शहरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकें।

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    विश्‍वास न्‍यूज की डिप्टी एडिटर देविका मेहता ने लोगों को डिजिटल सुरक्षा के उपाय बताए।

    डिजिटल डेस्क, नोएडा। दिल्‍ली में दैनिक जागरण और विश्‍वास न्‍यूज के सहयोग से गूगल ने प्रतिष्ठित 'डिजीकवच' कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेमिनार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन 'वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा: सच के साथी' अभियान के तहत हुआ।

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    सेमिनार में वरिष्ठ नागरिकों को ऑनलाइन स्कैम के प्रकार बताने के साथ ही उनसे बचने के तरीके भी बताए गए। दिल्ली के वजीराबाद स्थित क्ले 1 ग्रांड बैंक्वेट में हुए इस कार्यक्रम में सिंगल सीनियर्स वेलफेयर ट्रस्ट ने भी मदद की।

    विश्‍वास न्‍यूज के एक्सपर्ट ने लोगों को इस कार्यक्रम का महत्व बताते हुए कहा कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ठग कभी फिशिंग लिंक्स के जरिए, तो कभी फेक वेबसाइट के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। इनसे बचने के लिए सतर्कता जरूरी है।

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    कार्यक्रम में विश्‍वास न्‍यूज के एसोसिएट एडिटर आशीष महर्षि ने कुछ उदाहरणों के माध्‍यम से साइबर स्‍कैम के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से जिंदगीभर की कमाई साइबर ठगों के अकाउंट में जा सकती है।

    वहीं, विश्‍वास न्‍यूज की डिप्टी एडिटर देविका मेहता ने लोगों को गूगल और सोशल मीडिया अकाउंट के मजबूत पासवर्ड बनाने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए पासकी का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।

    साथ ही टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन के प्रयोग से भी अकाउंट को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने लुभावने मैसेज के साथ आने वाले फिशिंग लिंक्स पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी।

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    विश्‍वास न्‍यूज के एक्‍सपर्ट ने बताया कि ठग अक्सर बीमा या बैंक एजेंट बनकर यूजर की निजी और बैंकिंग जानकारी लेकर नया क्रेडिट कार्ड बनवा लेते हैं और आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए किसी के साथ भी अपनी निजी जानकारी और ओटीपी शेयर नहीं करने चाहिए। शुक्ला ने कहा कि अगर कोई साइबर क्राइम हो जाए, तो तुरंत 1930 पर इसकी जानकारी दें।

    सिंगल सीनियर्स वेलफेयर ट्रस्ट के सूरज मनचंदा ने कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा कि इंटरनेट के जमाने में ऐसा जागरूकता कार्यक्रम बहुत जरूरी है। वरिष्‍ठ नागरिक अलर्ट रहकर ही खुद को किसी भी प्रकार के फ्रॉड से बचा सकते हैं।


    कार्यक्रम के बारे में

    'वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा: सच के साथी' अभियान के तहत जागरण डिजिटल और विश्‍वास न्‍यूज की टीमें देशभर में सेमिनार और वेबिनार के माध्‍यम से ट्रेनिंग दे रही है। इसके तहत देश के 20 राज्‍यों के 30 शहरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    दिल्‍ली, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्‍थान, महाराष्ट्र, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पंजाब, उत्तराखंड जैसे 20 राज्‍यों में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें लोगों को ऑनलाइन स्कैम को पहचानने और उससे बचने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गूगल का ‘डिजीकवच’ अभियान भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ लोगों में जागरूकता बढ़ा रहा है। इस अभियान का लक्ष्‍य लोगों को फ्रॉड और स्‍कैम के प्रति जागरूक करना है।

    कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:

    https://www.jagran.com/digikavach