फरवरी के अंत तक दिया जाएगा औद्योगिक संबंध संहिता के नियम को अंतिम रूप, दिल्ली हाई कोर्ट को केंद्र ने बताया
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 के नियम फरवरी अंत तक अंतिम रूप ...और पढ़ें
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इंडस्ट्रियल रिलेशन काेड से संबंधित नियम को फरवरी के अंत तक अंतिम रूप दे दिए जाएगा।
HighLights
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को दी जानकारी।
औद्योगिक संबंध संहिता नियम फरवरी अंत तक होंगे अंतिम।
जनता से सुझाव मांगे गए, मौजूदा कमियां दूर होंगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 से जुड़ी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में बताया कि इंडस्ट्रियल रिलेशन काेड से संबंधित नियम को फरवरी के अंत तक अंतिम रूप दे दिए जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सालिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ को सूचित किया कि जनता से सुझाव मांगे गए हैं और नियमों को तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।
एसजी ने कहा कि केंद्र ने मौजूदा कमियों को दूर करने और सुचारू बदलाव सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को दो अधिसूचना जारी की है। यह भी कहा कि इन अधिसूचनाओं के माध्यम से 21 नवंबर 2025 से पहले के श्रम कानूनों को रद कर दिया है और यह साफ किया है कि पहले के श्रम कानूनों के तहत स्थापित ट्रिब्यूनल तब तक काम करते रहेंगे जब तक नए कोड के तहत ऐसे वैधानिक निकाय गठित नहीं हो जाते।
उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने यह कहते हुए मामले की कार्यवाही बंद कर दी कि याचिकाकर्ताओं की चिंताओं का समाधान कर दिया गया है।
अदालत ने साथ ही यह भी कहा कि अगर नए नियमों के बनने के बाद नए श्रम कोड के लागू होने में कोई दिक्कत आती है, तो याचिकाकर्ता उस समय याचिका में उन्हें उठा सकते हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता एन ए सेबेस्टियन और सुनील कुमार ने कहा कि कोड में सभी लंबित मामलों को ऐसे ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर करने का प्रविधान है जो मौजूद ही नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल और श्रम अदालतों का पूरा कामकाज ठप हो गया है और पूरी तरह से भ्रम की स्थिति में फंसा हुआ है।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 को नोटिफाई करते हुए अधिसूचना जारी की थी, लेकिन आज तक न तो कोड को लागू करने के लिए नियम बनाए गए हैं और न ही कोई ट्रिब्यूनल बनाया गया है।
