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गांवों की हवा भी हुई जहरीली: पंजाब और राजस्थान सहित इन राज्यों में शहरों के बराबर पहुंचा ग्रामीण प्रदूषण

By Sanjeev GuptaEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Fri, 30 Oct 2026 12:45 AM (IST)

एक नए विश्लेषण के अनुसार, भारत के ग्रामीण इलाकों में वायु प्रदूषण शहरों के लगभग बराबर हो गया है, जिससे ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. ग्रामीण इलाकों में वायु प्रदूषण शहरों के लगभग बराबर।

  2. हरियाणा, यूपी में ग्रामीण PM2.5 स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक।

  3. प्रदूषण नियंत्रण हेतु क्षेत्रीय योजनाओं की तत्काल आवश्यकता।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। आमतौर पर माना जाता है कि गांवों की हवा शहरों के मुकाबले साफ होती है, लेकिन एक नए विश्लेषण ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश के कई राज्यों में ग्रामीण इलाकों का वायु प्रदूषण शहरों के लगभग बराबर है।

दिल्ली समेत कई राज्यों में गांवों का वार्षिक पीएम 2.5 स्तर भारत के निर्धारित राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी ऊपर पाया गया है। मतलब, वायु प्रदूषण की समस्या सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं बल्कि इसका दायरा गांवों तक फैला हुआ है।

'इंडिया एयर क्वालिटी एंड एनर्जी इनसाइट्स' में अगस्त 2026 के दौरान प्रकाशित सेंटर फार रिसर्च एंड क्लीन एयर (सीआरइए) के मुख्य शोधकर्ता मनोज कुमार के विश्लेषण में वर्ष 2014 से 2023 तक के पीएम 2.5 आंकड़ों का अध्ययन किया गया।

इसके लिए सर्वे आफ इंडिया के गांवों की सीमाओं से जुड़े आंकड़ों और अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के वायुमंडलीय संरचना अनुसंधान समूह के प्रदूषण अनुमानों का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन में 24 राज्यों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना की गई।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के गांवों में भी प्रदूषण ज्यादा

विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2023 में हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में पीएम 2.5 का औसत स्तर 63.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और उत्तर प्रदेश में 60.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। दोनों ही राज्यों में यह राष्ट्रीय वार्षिक मानक से काफी अधिक है।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण इलाकों में पीएम2.5 का स्तर 48.4, त्रिपुरा में 47.4 और झारखंड में 46.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश और बंगाल में भी ग्रामीण क्षेत्रों का पीएम 2.5 स्तर राष्ट्रीय मानक से ऊपर रहा, जबकि इन राज्यों में शहरी और ग्रामीण प्रदूषण के बीच अंतर 10 प्रतिशत से कम था।

चार राज्यों में अंतर पांच प्रतिशत से भी कम

24 राज्यों में से 22 में शहरी पीएम 2.5 का स्तर ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक था, लेकिन अधिकांश राज्यों में यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं था। पंजाब, राजस्थान, बिहार और गोवा में शहरी और ग्रामीण प्रदूषण का अंतर पांच प्रतिशत से भी कम रहा।

शहरों के साथ गांवों को भी जोड़ना होगा

विश्लेषण के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं को केवल शहरों तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय स्तर पर तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए गांवों में भी वायु गुणवत्ता की निगरानी, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और नियंत्रण के उपाय जरूरी हैं।

प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत और हवा के साथ प्रदूषकों का फैलाव प्रशासनिक सीमाओं तक नहीं रुकता, इसलिए शहरों और गांवों को एक ही वायु क्षेत्र का हिस्सा मानकर योजनाएं बनाने से ही प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकते हैं।