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भारत में बढ़ी रोबोटिक सर्जरी की रफ्तार, एक साल में 30K से बढ़कर 50 हजार के पार पहुंचा आंकड़ा; बढ़ा मेडिकल टूरिज्म

Published: Sun, 04 Oct 2026 06:30 AM (IST)

भारत में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मेडिकल टूरिज्म को नई गति मिली है और ...और पढ़ें

देश में हर वर्ष 50 हजार से अधिक रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब 30 हजार थी।

देश में हर वर्ष 50 हजार से अधिक रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब 30 हजार थी।

HighLights

  1. रोबोटिक सर्जरी की संख्या 30 हजार से बढ़कर 50 हजार हुई।

  2. कम खर्च और सटीकता से विदेशी मरीज भारत में उपचार करा रहे हैं।

  3. नई दिल्ली में एसआरएस-2026 सम्मेलन, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी लॉन्च।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। भारत में रोबोटिक सर्जरी का तेजी से बढ़ता उपयोग देश में मेडिकल टूरिज्म को नई रफ्तार दे रहा है। अमेरिका और यूरोप की तुलना में कम खर्च में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी उपलब्ध होने से विदेशी मरीजों के लिए भारत उपचार का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।

हर वर्ष 50 हजार से अधिक रोबोटिक सर्जरी

देश में हर वर्ष 50 हजार से अधिक रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब 30 हजार थी। अगले वर्ष इसके एक लाख से अधिक पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए एशिया का पहला तीन दिवसीय सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी (एसआरएस)-2026 सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में हो रहा है। सम्मेलन में एसआरएस ने देश में प्रशिक्षित रोबोटिक सर्जन बढ़ाने के लिए रोबोटिक सर्जरी का प्रमाणित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी लांच किया है।

रीढ़, मस्तिष्क, हृदय, कैंसर सर्जरी में अधिक सटीकता

सफदरजंग अस्पताल के यूरोलाजी, रोबोटिक और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के अध्यक्ष प्रो. डा. अनूप कुमार के अनुसार रोबोटिक सर्जरी से सर्जरी में अधिक सटीकता आती है। छोटे चीरे के साथ जटिल अंगों तक बेहतर पहुंच और बारीक काम करने की क्षमता मिलती है।

इसका फायदा विशेष रूप से रीढ़, मस्तिष्क, हृदय, कैंसर, प्रोस्टेट जैसी जटिल सर्जरी में मिल रहा है। रोबोटिक तकनीक के विस्तार से अत्याधुनिक उपचार को बढ़ावा मिल रहा है। रोबोटिक सर्जरी से आपरेशन के दौरान रक्तस्राव भी कम होता है, इससे जटिल सर्जरी में पहले की तुलना में रक्त की आवश्यकता काफी कम हो गई है।

मध्य-पूर्व से यूरोप व पूर्व सोवियत संघ से मरीज

मध्य-पूर्व के देशों के साथ पूर्व सोवियत संघ के उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, अजरबैजान और आर्मेनिया जैसे देशों से भी मरीज रोबोटिक सर्जरी के लिए भारत पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यूरोप और अमेरिका से भी मरीज आ रहे हैं।

प्रशिक्षित सर्जनों की संख्या बढ़ाना आवश्यक

एसआरएस इंडिया-2026 के आयोजन अध्यक्ष रोबोटिक सर्जरी विभाग मैक्स अस्पताल के निदेशक डाॅ. विवेक बिंदल ने शनिवार को बताया कि देश में रोबोटिक सर्जरी के प्रशिक्षित सर्जनों की संख्या कम है।

एसआरएस इंडिया समेत विभिन्न संस्थाएं उनके प्रशिक्षण पर जोर दे रही हैं। एसआरएस सर्जरी के कार्यकारी निदेशक और अमेरिका के ग्लोबल रोबोटिक इंस्टीट्यूट के एमडी डाॅ. विपुल पटेल तथा अमेरिका के रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञ डाॅ. एडुआर्डो पार्रा-डेविला ने भी प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता को रोबोटिक सर्जरी के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया।