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देशभर में बदलता मौसम अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक, सामने आई डरावनी रिपोर्ट

Published: Tue, 19 May 2026 11:06 PM (IST)Updated: Tue, 19 May 2026 11:12 PM (IST)

मौसम का लगातार गर्म होना भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बन गया है, जिसका दिल्ली सहित देश भर ...और पढ़ें

मौसम का लगातार गर्म होना भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बन गया है। इमेज एआई

मौसम का लगातार गर्म होना भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बन गया है। इमेज एआई

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर सहित देश भर में लगातार गर्म होता मौसम अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुका है। इसका असर न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी इसके प्रभावों से अछूती नहीं है।

गैर सरकारी संगठनों ''क्लाइमेट राइज एलायंस'' और ''दासरा'' द्वारा हाल ही में जारी की गई नवीनतम संयुक्त रिपोर्ट 'अंडर द वेदर: इंडियाज क्लाइमेट-हेल्थ इंटरसेक्शंस एंड पाथवेज टू रेजिलिएंस' ने देश में पैर पसारते जलवायु संकट को लेकर एक गंभीर और डरावनी तस्वीर पेश की है। दिल्ली के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बाय) पर इस मौसम का सबसे घातक असर पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य पर संकट : बढ़ते तापमान की वजह से गर्भवती महिलाओं में मानसिक तनाव, उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के अनुसार, देश में 13 प्रतिशत बच्चे समय से पहले व 17 प्रतिशत बच्चे कम वजन के साथ पैदा हो रहे हैं, जिसका एक बड़ा संबंध प्रतिकूल मौसमी दशाओं से पाया गया है।
  • शिक्षा और बच्चों पर मानसिक आघात : साल 2022 से अब तक दुनिया भर में 40 करोड़ से अधिक छात्रों को चरम मौसम के कारण स्कूल बंद होने का सामना करना पड़ा है। इस व्यवधान से बच्चों में सीखने की क्षमता कम हो रही है और वे लंबे समय तक रहने वाले मानसिक आघात का शिकार हो रहे हैं।
  • देशव्यापी मौसमी आपदाएं : रिपोर्ट में ''ए ईयर इन क्लाइमेट इवेंट्स'' के तहत बताया गया है कि उत्तर भारत (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) में अत्यधिक शीत लहर के कारण स्कूलों को 10 दिनों के लिए बंद करना पड़ा, वहीं मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने से सबसे अधिक (188) मौतें हुईं। इसके अलावा केरल के वायनाड में भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई।
  • उम्मीद की किरण : इस भीषण संकट के बीच रिपोर्ट में सकारात्मक और व्यावहारिक कदमों का भी उल्लेख किया गया है। भारत के कुछ राज्यों ने इस चुनौती से निपटने के लिए अपनी ''राज्य स्तरीय जलवायु-स्वास्थ्य कार्य योजनाओं'' के तहत बेहतरीन प्रयास शुरू किए हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, गोवा और छत्तीसगढ़ ऐसे राज्यों में शामिल हैं जिन्होंने इस दिशा में सबसे आशाजनक रणनीतियां अपनाई हैं।

इन राज्यों द्वारा किए जा रहे मुख्य कार्यों में शामिल 

  • स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों को हीट-प्रूफ (गर्मी से सुरक्षित) बनाना।
  • चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखलाओं को पर्यावरण-अनुकूल या ग्रीन बनाना।
  • मौसम की समय पर जानकारी देने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम (प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली) लागू करना। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता निर्माण और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना।

स्थिति में सुधार के लिए सुझाव

रिपोर्ट में इस पर विशेष जोर दिया गया है कि स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और शहरी नियोजन विभागों को अपने पारंपरिक दायरों से बाहर निकलकर एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि इस गहराते संकट से आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों को बचाया जा सके।

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