भारत में तेजी से बढ़ रहे गर्मी के हॉटस्पॉट, 52 साल में 40% तक फैला दायरा; उत्तर-पश्चिम सबसे ज्यादा प्रभावित
भारत में अत्यधिक गर्मी की चपेट में आने वाला क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, खासकर मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
भारत में अत्यधिक गर्मी का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है।
उत्तर-पश्चिम भारत गर्मी का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया।
जलवायु परिवर्तन से निपटने को क्षेत्रीय तैयारी जरूरी।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। भारत में अब सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि अत्यधिक गर्मी की चपेट में आने वाला क्षेत्र भी लगातार फैल रहा है। 52 वर्षों (1971-2022) के मौसम विभाग के आंकड़ों के अध्ययन में सामने आया है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक तापमान की चपेट में आने वाला क्षेत्र हर दशक में 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा है।
पहले जहां गर्मी के छोटे-छोटे क्षेत्र दिखाई देते थे, वहीं अब ये बड़े और आपस में जुड़े इलाकों में बदल रहे हैं। गर्मी और उमस का खतरनाक मेल भी तटीय इलाकों से आगे बढ़कर देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के विज्ञानियों के इस अध्ययन में मौसम की चरम स्थितियों को समझने के लिए सात अलग-अलग संकेतकों को शामिल किया गया। इनमें दिन की गर्मी, उमस भरी गर्मी, लू की गंभीरता और सूखे जैसी स्थितियां शामिल हैं।
अध्ययन में 1971 से 2022 तक के आंकड़ों के आधार पर इन बदलावों का विश्लेषण किया गया। सितंबर 2026 में अध्ययन पीयर-रिव्यूड ''इंटरनेशनल जर्नल आफ क्लाइमेटोलाजी'' में भी प्रकाशित हुआ है। है।
इसमें 52 वर्षों के अवलोकनों पर आधारित एक एकल ''इंडिया क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स'' तैयार करने के लिए दिन की गर्मी, आर्द्र गर्मी, लू की गंभीरता और सूखे सहित सात अलग-अलग खतरों को शामिल किया गया है।
उत्तर-पश्चिम में सबसे ज्यादा गर्मी का दबाव
अध्ययन में उत्तर-पश्चिम भारत को अत्यधिक गर्मी का प्रमुख क्षेत्र बताया गया है। यहां दिन के तापमान, उमस भरी गर्मी और लू की गंभीरता में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई।
1980 के दशक में जो गर्मी के क्षेत्र अलग-अलग स्थानों पर सीमित थे, वे 2010 के दशक तक बड़े और लगातार जुड़े गर्मी वाले क्षेत्रों में बदल गए। मध्य भारत में भी गर्मी के दबाव वाले क्षेत्र बढ़े हैं।
दक्षिण में सूखा, पूर्वोत्तर में बदलता वर्षा का मिजाज
देश के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु बदलाव का असर अलग तरीके से सामने आ रहा है। दक्षिण भारत में सूखे का दबाव बढ़ रहा है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के पूर्वी तटीय इलाकों में लंबे समय तक सूखे की स्थिति वाले क्षेत्र सामने आए हैं।
वहीं पूर्वोत्तर में एक ओर कम समय में बहुत अधिक वर्षा हो रही है, तो दूसरी ओर सूखे के दौर भी देखने को मिल रहे हैं। इससे मानसून के मिजाज में बढ़ती अस्थिरता का संकेत मिलता है।
हर इलाके के लिए अलग तैयारी जरूरी
शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिम में गर्मी से बचाव की योजनाएं मजबूत करने, दक्षिण में पानी और सूखे का बेहतर प्रबंधन तथा पूर्वोत्तर में बाढ़ और अत्यधिक वर्षा से निपटने की तैयारी बढ़ाने की जरूरत बताई है। साथ ही जिला स्तर पर मौसम की निगरानी बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
आम जन पर व्यापक असर
बढ़ती गर्मी का मतलब केवल अधिक गर्म दिन नहीं है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य, पेयजल की उपलब्धता, खेती और शहरों की बिजली व पानी की मांग पर पड़ सकता है।
खासकर उत्तर-पश्चिम भारत के शहरों में गर्मी से बचाव की व्यवस्था, पर्याप्त पानी और संवेदनशील लोगों के लिए समय रहते चेतावनी जरूरी होगी। वहीं सूखे वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और खेती की तैयारी तथा अधिक बारिश वाले इलाकों में बाढ़ से बचाव पर पहले से काम करना होगा।
अध्ययन का संकेत साफ है कि जलवायु का खतरा पूरे देश में एक जैसा नहीं है, इसलिए बचाव की तैयारी भी इलाके की जरूरत के हिसाब से करनी होगी।
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