देश की 76 प्रतिशत आबादी पर मंडराया संकट, दिल्ली के आधे से ज्यादा जिलों में 'रेड अलर्ट'
भारत में जलवायु परिवर्तन एक 'खामोश आपदा' बन गया है, जिसमें 76% आबादी और 57% जिले उच्च गर्मी जोखिम में ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated
HighLights
भारत में जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा
76% आबादी प्रभावित, दिल्ली के जिलों में 'रेड अलर्ट'
हीट एक्शन प्लान में 'कूल रूफ' जैसी तकनीकें शामिल
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। भारत में जलवायु परिवर्तन अब एक ''खामोश आपदा'' का रूप ले चुका है। प्राकृतिक संसाधन रक्षा परिषद (एनआरडीसी) की नई रिपोर्ट के अनुसार देश के 57 प्रतिशत जिले उच्च से अति-उच्च हीट रिस्क की श्रेणी में हैं। वहीं देश की लगभग 76 प्रतिशत आबादी इससे सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। अनुमान है कि इस सदी के अंत तक लू की आवृत्ति तीन से चार गुना तक बढ़ जाएगी।
भारत मंडपम में हुए दो दिवसीय ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम के दौरान मंगलवार को जारी एनआरडीसी की इस रिपोर्ट में दिल्ली एवं एनसीआर ही नहीं, देश भर की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार अकेले 2024 में देश भर में हीटस्ट्रोक के 44,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। 1992 से 2015 के बीच लू के कारण 24,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
बदलती नीति : राहत से लचीलेपन की ओर
अब भारत के हीट एक्शन प्लान (एचएपी) केवल ''एडवाइजरी'' तक सीमित नहीं हैं। वाराणसी, जोधपुर और ठाणे जैसे शहरों में अब वार्ड-स्तर पर मैपिंग की जा रही है। जोधपुर में ''नेट-जीरो कूलिंग स्टेशन'' जैसे नवाचार किए गए हैं, जो बाहरी तापमान की तुलना में 8 से 12 डिग्री सेल्सियस तक ठंडक प्रदान करते हैं।
इसके अलावा 11 राज्यों ने हीटवेव को ''राज्य-विशिष्ट आपदा'' घोषित कर दिया है, जिससे राहत कार्यों के लिए सीधे आपदा निधि (एसडीआरएफ) का उपयोग संभव हो गया है। दिल्ली में कश्मीरी गेट और आनंद विहार बस अडडे पर ''कूल रूफ'' तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है, ताकि छतों के जरिए होने वाली गर्मी को कम किया जा सके। झुग्गी बस्तियों और बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय भी योजना का हिस्सा हैं।
दिल्ली की हालत भी कम चिंताजनक नहीं
राजधानी के लिए भी रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। दिल्ली के शहरी जिलों में गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक जिले ''अति उच्च जोखिम'' की श्रेणी में आ चुके हैं।
रिपोर्ट के मानचित्र के अनुसार, दिल्ली के मध्य, उत्तर, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्वी हिस्से इस उच्च जोखिम पट्टी का हिस्सा हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव इसलिए अधिक है क्योंकि यहां कंक्रीट का ढांचा ज्यादा और हरियाली कम है, जिससे दिन की गर्मी रात में भी वातावरण में बनी रहती है।
रिपोर्ट बताती है कि 2025 में भारत का औसत तापमान 1991-2020 के औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जिससे यह 1901 के बाद आठवां सबसे गर्म साल बन गया। दिल्ली जैसे शहरों में यह वृद्धि और भी अधिक महसूस की गई है। रिपोर्ट में एक जानकारी यह भी सामने आई है कि दिनों की तुलना में अब रातों का तापमान अधिक तेजी से बढ़ रहा हैं। भविष्य में यह वृद्धि 70 प्रतिशत तक चले जाने का अनुमान है।
लंबी अवधि का समाधान
रिपोर्ट सुझाव देती है कि केवल पानी पिलाने या शेल्टर बनाने से काम नहीं चलेगा। अब ''ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर'' (जलाशय और हरियाली) और ''पैसिव कूलिंग'' (बिना बिजली वाली ठंडक) को शहरी नियोजन का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।
