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देश भर की विधानसभाओं में एक जैसे होंगे नियम, पांच राज्यों की बैठक में हुए बड़े फैसले

Published: Tue, 27 Oct 2026 06:26 PM (IST)

दिल्ली में आयोजित एक बैठक में देश की विधानसभाओं के लिए समान नियम बनाने पर चर्चा हुई। पांच राज्यों के प्रतिनिधियों ने आदर्श नियमों के प्रारूप पर विचार किया।

बैठक के दौरान लिए गए बड़े फैसले।

बैठक के दौरान लिए गए बड़े फैसले।

HighLights

  1. विधानसभा नियमों में एकरूपता लाने पर दिल्ली में बैठक।

  2. पांच राज्यों के प्रतिनिधियों ने आदर्श प्रारूप पर चर्चा की।

  3. कार्यवाही को व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने का लक्ष्य।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश की विधानसभाओं में कामकाज के नियमों में एकरूपता लाने के लिए सोमवार को दिल्ली में बैठक हुई। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित समिति विभिन्न विधानसभाओं के लिए आदर्श नियमों के प्रारूप और उसकी अनुशंसाओं पर चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने की। कहा कि देश भर की विधानसभाएं हैं, उनकी अपनी नियमावली हैं, उदाहरण के लिए बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के नियम 1958 से चले आ रहे थे, अब कुछ साल पहले समीक्षा की गई, और बदलाव किए गए हैं। जबकि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अब देश भर की सभी विधानसभा के लिए एक जैसे नियम बनेंगे।

संवैधानिक सुरक्षा पर दिया गया है जोर

संवैधानिक सुरक्षा पर जोर देते हुए गुप्ता ने कहा कि मॉडल नियमों में दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इन क्षेत्रों की विधायिकाएं संवैधानिक प्रावधानों और विशेष कानूनों के तहत काम करती हैं।

इनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 भी शामिल है। उन्होंने द्विसदनीय विधायिकाओं के लिए उचित प्रावधान करने का सुझाव दिया, जिनमें विधान परिषदों, उनके पीठासीन अधिकारियों, सचिवालय के अधिकारियों और दोनों सदनों के बीच आपसी व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल हों।

नागालैंड को छोड़कर पांच राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल

उन्होंने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पीठासीन पदों के चुनाव, सभापति तालिका के नामांकन तथा अध्यक्ष के कार्यों को अन्य अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की आवश्यकता भी बताई।

बैठक में नागालैंड को छोड़कर पांच राज्यों की विधानसभाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य सदन की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए साझा रूपरेखा तैयार करना था। बैठक में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और दिल्ली की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।