दुनिया भर में बढ़ रहा भारतीय आयुर्वेद का क्रेज, नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा; 77 देशों में हुआ विस्तार
भारतीय आयुर्वेद योग की तरह वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। अब इसकी मौजूदगी 77 देशों तक ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड।
HighLights
77 देशों में भारतीय आयुर्वेद की मजबूत वैश्विक उपस्थिति।
32 देशों के 277 विदेशी विद्यार्थी भारत में कर रहे आयुष की पढ़ाई।
आयुर्वेद शिक्षा, उपचार और शोध में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ रही है।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। योग की तरह भारतीय आयुर्वेद भी दुनिया में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। दुनिया के 77 देशों में किसी न किसी रूप में इसकी मौजूदगी है।
भारत के 25 देशों के साथ पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में समझौते हैं, जबकि 52 विदेशी संस्थानों के साथ शैक्षणिक और शोध सहयोग है।
क्या कहती है नीति आयोग की रिपोर्ट?
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 32 देशों के 277 विदेशी विद्यार्थी भारत में आयुष की विभिन्न पद्धतियों की पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले एक दशक में आयुर्वेद को लेकर विदेशों में रुचि बढ़ी है। अब इसका विस्तार केवल आयुर्वेदिक उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, उपचार, वैज्ञानिक अनुसंधान और नई खोजों तक पहुंच रहा है।
शोध, पेटेंट और ज्ञान के आदान-प्रदान से बढ़ रहा दायरा
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआइआइए) के निदेशक प्रो. पीके प्रजापति के अनुसार संस्थान ने 22 देशों के संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इनके माध्यम से आयुर्वेद की शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ अनुसंधान, विशेषज्ञों तथा ज्ञान का आदान-प्रदान हो रहा है।
संस्थान के नाम छह पेटेंट हैं, जबकि दो पेटेंट के लिए आवेदन किए गए हैं। यह आयुर्वेद में पारंपरिक ज्ञान को शोध और नवाचार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संस्थान में 15 देशों के विद्यार्थी शिक्षा या प्रशिक्षण ले चुके हैं और हर वर्ष आते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही रुचि
जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आइटीआरए) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 22 देशों के 54 विद्यार्थी बीएएमएस, चार देशों के आठ विद्यार्थी एमडी और दो देशों के दो विद्यार्थी पीएचडी की पढ़ाई कर रहे थे। विदेशी विद्यार्थियों की भागीदारी भारतीय आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझने और सीखने की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।
अमेरिका में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम
एआइआइए के संस्थापक निदेशक रह चुके डा. अभिमन्यु कुमार जो उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय और जोधपुर स्थित डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं तथा वर्तमान में शिकागो (अमेरिका) में स्थापित आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति हैं।
उनके अनुसार विद्यार्थी आयुर्वेद पाठ्यक्रम में प्रवेश ले रहे हैं, स्थानीय लोग आयुर्वेदिक उपचार कराने के साथ इस चिकित्सा पद्धति के बारे में जानकारी लेने में रुचि दिखा रहे हैं। यह विदेशों में आयुर्वेद की शिक्षा और उपचार के लिए बढ़ते अवसरों को बताता है।
विदेशों में शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग
जर्मनी में घुटनों के आस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों पर आयुर्वेद आधारित उपचार का नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन को भारतीय आयुर्वेद संस्थानों के साथ साझा किया गया।
भारतीय आयुर्वेद की वैश्विक पहचान के लिए जर्मनी की यूरोपियन एकेडमी ऑफ आयुर्वेद, ब्रिटेन की लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रापिकल मेडिसिन और कालेज ऑफ मेडिसिन, आस्ट्रिया की ग्राज मेडिकल यूनिवर्सिटी, अमेरिका की हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, ब्राजील की साओ पाउलो और रियो डी जेनेरियो की संघीय यूनिवर्सिटी शामिल है।
इसके अलावा आस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी, फ्रांस के रीयूनियन द्वीप का सेंट्रल हास्पिटल यूनिवर्सिटी, इंडोनेशिया की यूनिवर्सिटास हिंदू इंडोनेशिया, जापान की शिमाने यूनिवर्सिटी, क्रोएशिया का क्वार्नर हेल्थ टूरिज्म क्लस्टर, कनाडा का यूनिवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क और क्यूबा की हवाना मेडिकल यूनिवर्सिटी शामिल हैं।
