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क्यों अंदर से टूट रहे होनहार स्टूडेंट्स? IIT दिल्ली के दो छात्रों की मौत पर एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

Published: Sun, 04 Oct 2026 01:35 PM (IST)

आईआईटी दिल्ली में हाल ही में दो छात्रों की मौत ने उच्च शिक्षण संस्थानों में मेधावी छात्रों पर बढ़ते भावनात्मक ...और पढ़ें

आईआईटी दिल्ली के दो छात्रों की मौत से विशेषज्ञों ने चिंता जताई। AI जनरेटेड

आईआईटी दिल्ली के दो छात्रों की मौत से विशेषज्ञों ने चिंता जताई। AI जनरेटेड

HighLights

  1. आईआईटी दिल्ली में डेढ़ माह में दो छात्रों की मौत।

  2. मेधावी छात्र सफलता के दबाव और प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे।

  3. मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक जुड़ाव की आवश्यकता।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। आईआईटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्र पढ़ाई में असाधारण रूप से सक्षम होते हैं। कठिन प्रतियोगी परीक्षा पास करने, जटिल विषयों को समझने और लंबे समय तक एकाग्र होकर मेहनत करने की क्षमता उनकी बड़ी ताकत होती है।

इसके बावजूद यही मेधावी छात्र भावनात्मक दबाव में टूट रहे हैं। आईआईटी दिल्ली में डेढ़ महीने के भीतर दो छात्रों की मौत ने सवाल खड़ा किया है कि तेज दिमाग होने के बावजूद छात्र जिंदगी की मुश्किल परिस्थितियों से क्यों नहीं निपट पा रहे हैं।

18 अगस्त को खाई थीं नींद की गोलियां

पीएचडी छात्र मनीष आनंद ने 18 अगस्त को कटवारिया सराय स्थित पीजी में नींद की गोलियां खाने के बाद तबीयत बिगड़ने पर एम्स के जेपीएन एपेक्स ट्रामा सेंटर में उपचार कराया। करीब डेढ़ माह तक उपचार के बाद 3 अक्टूबर को उनकी मृत्यु हो गई।

पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है और आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले 22 अगस्त को एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत हुई थी। मामले की जांच के लिए आईआईटी दिल्ली ने बाहरी जांच समिति गठित की थी।

तेज छात्र भी घबरा सकते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि पढ़ाई-लिखाई की क्षमता और व्यावहारिक व सामाजिक समझ अलग-अलग बातें हैं। विपरीत परिस्थितियों में तेज छात्र भी घबरा सकते हैं। इसलिए पढ़ाई के साथ भावनाओं को समझने, असफलताओं से उबरने, सामाजिक रूप से जुड़े रहने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें मदद मांगने का अवसर मिलना जरूरी है।

स्कूल-कॉलेज तक बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र अक्सर अपने से कमजोर विद्यार्थियों के बीच लगातार आगे रहते हैं। लेकिन आईआईटी जैसे संस्थान में पहुंचने के बाद उनका सामना अपने बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं से होता है। यहां पहले जैसा प्रदर्शन दोहराने और हर बार खुद को साबित करने का दबाव बढ़ जाता है। इसके साथ असफलता का डर, करियर और नौकरी की चिंता, परिवार की अपेक्षाएं और सामाजिक तुलना जुड़ती जाती है। लगातार पढ़ाई, नींद की कमी और सामाजिक दूरी भावनात्मक परेशानी को और बढ़ा सकती है। - डॉ. राजेश सागर, प्रोफेसर, मनोरोग विभाग, एम्स

आत्मघाती कदम का कोई एक कारण नहीं होता। मानसिक परेशानी, तनाव से निपटने की क्षमता और व्यक्तित्व सहित कई कारक जोखिम बढ़ा सकते हैं। परिवार, दोस्तों और संस्थान का सहयोग महत्वपूर्ण बचाव कारक है। व्यवहार में होने वाले बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए। - निमेष जी. देसाई, पूर्व निदेशक, इहबास

प्रमुख घटनाएं

  • 12 फरवरी 2023, आईआईटी बांबे: प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र दर्शन सोलंकी की मौत।
  • 22 अक्टूबर 2024, आईआईटी दिल्ली: एमएससी द्वितीय वर्ष के छात्र कुमार यश की हास्टल में मौत
  • 4 जून 2025, आईआईटी दिल्ली: बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के पीएचडी छात्र आयुष सिंघल की परिसर स्थित कमरे में मौत
  • 12 मार्च 2026, आईआईटी दिल्ली: प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र हर्षित स्वामी की परिसर स्थित आवास में मौत हुई।
  • 22 अगस्त 2026, आईआईटी दिल्ली: एमएससी फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत हुई।

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