IIT दिल्ली ने विकसित किया राष्ट्रीय ध्वज का वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग मॉडल, सम्मानजनक निस्तारण का समाधान तैयार
आईआईटी दिल्ली ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मानजनक निस्तारण के लिए एक वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग मॉडल विकसित किया है। यह तकनीक पुराने और क्षतिग्रस्त झंडों को रीसायकल करने का एक टिकाऊ तरीका प्रदान करती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है। यह पहल राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ावा देती है।

IIT दिल्ली ने दो साल की शोध के बाद खोजा समाधान।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश में हर घर तिरंगा अभियान के साथ ही व अन्य अवसरों पर करोड़ों लोग हर साल राष्ट्रीय ध्वज अपने घरों में शान के साथ फहराते हैं और फिर सम्मानपूर्वक सुरक्षित रख देते हैं। समय बीतने के साथ तिरंगों का रंग फीका पड़ने पर वे उम्र पूरी कर चुके ध्वज बन जाते हैं।
इन ध्वजों का सम्मानजनक और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण कैसे हो यह सवाल लंबे समय से अनुत्तरित था। अब आइआइटी दिल्ली ने दो साल की लंबी शोध प्रक्रिया के बाद इसका समाधान खोज निकाला है।
देश में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) का सफल माडल तैयार किया गया है। शोध की शुरुआत में पूरे भारत से लगभग एक हजार राष्ट्रीय ध्वज एकत्र कर करीब 400 किलो वेस्ट सामग्री को अलग-अलग रंगों केसरिया, सफेद और हरा में पृथक किया गया। इसके बाद इसी अपशिष्ट से दोबारा नए तिरंगों का निर्माण किया गया।
छोटे-बड़े दोनों आकारों के झंडे बनाए
छोटे-बड़े, दोनों आकारों के ध्वज सफलतापूर्वक तैयार हुए। इसके साथ ही तकनीकी दस्तानों (टेक्निकल ग्लव्स) को काटकर दोबारा उपयोगी फाइबर में बदला गया तथा रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले बुलेटप्रूफ जैकेट व एयरोस्पेस उपकरणों के लिए नए रूप में तैयार किए जा रहे उच्च-ग्रेड फाइबर भी प्रदर्शित किए गए।
भारत को टेक्निकल टेक्सटाइल्स के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह पहल एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अटल सेंटर आफ टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी (एसीटीआरएस) ने आइआइटी दिल्ली के अधीन हरियाणा के पानीपत में राष्ट्रीय टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन (एनटीटीएम) के सहयोग से उन्नत तकनीकें उद्योग जगत को हस्तांतरित की हैं।
शोध उपलब्धियों का प्रदर्शन
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में एसीटीआरएस ने अपनी शोध उपलब्धियों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सिंथेटिक राष्ट्रीय ध्वजों के सम्मानजनक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण हेतु विकसित अनोखी तकनीक रही।
यह तकनीक सेवाड नीसिम फाउंडेशन को हस्तांतरित की गई, जिसका नेतृत्व मेजर जनरल अशिम कोहली (से.नि.) कर रहे हैं। फाउंडेशन पूरे देश में रिटायर्ड राष्ट्रीय ध्वजों के गरिमापूर्ण निस्तारण को अभियान के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
रक्षा क्षेत्र के उपकरणों का भी प्रदर्शन
इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला अरैमिड फाइबर, एयरोस्पेस, बुलेटप्रूफ जैकेट और सुरक्षा परिधानों के पुनर्चक्रण की नवीन तकनीकें भी प्रदर्शित की गईं। इन तकनीकों से भारत की रक्षा और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को नई दिशा मिलेगी।
एनटीटीएम के मिशन निदेशक अशोक मल्होत्रा ने कहा कि भारत को तकनीकी टेक्सटाइल्स में वैश्विक नेतृत्व दिलाने के लिए अकादमिक और उद्योग जगत की साझेदारी मजबूत की जा रही है। वहीं आइआइटी दिल्ली के प्रो. बिपिन कुमार ने बताया कि पानीपत स्थित यह केंद्र सर्कुलर इकानमी आधारित टेक्सटाइल नवाचार का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

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