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डायबिटीज के मरीजों के न भरने वाले घावों पर बड़ी खोज, IIT दिल्ली ने बनाया खास स्प्रे; चूहों पर टेस्ट सफल

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:44 AM (IST)

आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने मधुमेह के मरीजों के लिए एक स्प्रे करने योग्य हाइड्रोजेल विकसित किया है। यह घावों ...और पढ़ें

बिना मलहम पट्टी ठीक हो जाएगा घाव। फोटो: सांकेतिक

बिना मलहम पट्टी ठीक हो जाएगा घाव। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. IIT दिल्ली ने मधुमेह के घावों के लिए स्प्रे हाइड्रोजेल बनाया

  2. यह घावों को तेजी से भरता है, पट्टी की जरूरत नहीं

  3. चूहों पर सफल परीक्षण, अब मानव परीक्षण की तैयारी

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। मधुमेह के मरीजों के लंबे समय से न भरने वाले घाव में बार-बार मलहम- पट्टी करने की आवश्यकता अब जल्द खत्म होने की उम्मीद है।

IIT दिल्ली के सेंटर आफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने ऐसा स्प्रे करने योग्य ऐसा हाइड्रोजेल विकसित किया है, जिसे सीधे घाव पर छिड़का जा सकता है। जो बिना किसी मलहम और पट्टी घाव को जल्द से जल्द ठीक कर देता है।

चूहों पर किए गए परीक्षण में इसके बेहतर और सार्थक परिणाम मिले। शोधकर्ताओं ने हाइड्रोजेल की तुलना बाजार में उपलब्ध स्प्रे से की। परीक्षण में नए हाइड्रोजेल से करीब छह दिन में घाव भर गए, जबकि बाजार में मिलने वाले स्प्रे इससे कहीं कमजोर रहे।

घाव भरने के साथ नई कोशिकाएं बनती हैं

हाइड्रोजेल से घाव भरने, नई कोशिकाओं के बनने, कोलेजन जमने और नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण में भी सुधार देखा गया, जबकि बाजार में मिलने वाले स्प्रे में यह इतना प्रभावी नहीं मिला।

शोधकर्ताओं का दावा है कि हाइड्रोजेल में जीवाणुरोधी प्रभाव के साथ सूजन और आक्सीकरण नुकसान को कम करने की क्षमता भी पाई गई। ‘एडवांस्ड हेल्थकेयर मैटेरियल्स’ में प्रकाशित इस शोध के लेखक IIT दिल्ली बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डाॅ. सचिन कुमार बी हैं।

पेटेंट के बाद अब मानव परीक्षण की तैयारी

इसका भारतीय पेटेंट आवेदन किया जा चुका है। बताया गया कि इसमें IIT के शोधकर्ताओं के साथ एम्स दिल्ली के शोधार्थी भी शामिल हैं, अब एम्स चिकित्सकों के सहयोग से मानव परीक्षण के जरिये इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा का आकलन किया जाना है, जिसके बाद मरीजों में इसके उपयोग का रास्ता साफ हो जाएगा।

शोधकर्ताओं ने इस हाइड्रोजेल को एल्जिनेट और फाइब्रिन से तैयार किया है। इसमें पाॅलीलैक्टिक एसिड के सूक्ष्म वाहकों के जरिये कैल्शियम, जिंक और तांबे के कण शामिल किए गए हैं। स्प्रे करने के बाद ये तत्व घाव वाली जगह पर धीरे-धीरे फैलते हैं।

कैल्शियम, जिंक और तांबा करेंगे घाव पर काम

कैल्शियम खून का थक्का बनने और कोशिकाओं की सक्रियता में मदद करता है। जिंक संक्रमण और सूजन को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है, जबकि तांबा नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण, कोलेजन बनने और टिश्यू के पुनर्निर्माण में मदद करता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार हाइड्रोजेल केवल घाव में संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं को ही नियंत्रित नहीं करता, यह कोशिकाओं की सक्रियता बढ़ाने, आक्सीकरण से होने वाले नुकसान को कम करने, शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर करने, नई कोशिकाओं और कोलेजन बनने में भी मदद करता है।

मधुमेह में रक्त संचार और कोशिकाओं की मरम्मत प्रभावित होने से घाव लंबे समय तक बने रहते हैं। यह तकनीक भविष्य में मधुमेह के घावों के साथ लंबे समय से न भरने वाले जख्म और जलने के घाव के उपचार में बेहद प्रभावी हो सकती है।

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