6G की राह आसान करेगा LiFi, रोशनी से इंटरनेट को तेज करेगा IIIT-दिल्ली का रिसर्च
आईआईआईटी-दिल्ली के शोधकर्ता भविष्य के 6जी नेटवर्क के लिए लाईफाई, वाईफाई और विजिबल लाइट कम्युनिकेशन को एकीकृत करने पर काम कर रहे हैं।

सांकेतिक तस्वीर, एआई जनरेटेड।
HighLights
लाईफाई, वाईफाई और वीएलसी को एकीकृत कर रहे शोधकर्ता।
सोलर पैनल को डेटा रिसीवर बनाने पर हो रहा काम।
बाधाओं के पार कनेक्टिविटी के लिए नई तकनीक विकसित।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। इंटरनेट की दुनिया में अब रेडियो तरंगों के साथ रोशनी भी डेटा पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी-दिल्ली) के शोधकर्ता ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो भविष्य में वायरलेस नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
प्रो. विवेक अशोक बोहरा के नेतृत्व में चल रहे शोध का फोकस विजिबल लाइट कम्युनिकेशन (वीएलसी), लाईफाई और वाईफाई को एक साथ इस्तेमाल करने पर है।
इसमें सोलर पैनल को डेटा रिसीवर बनाने, बाधाओं के पार कनेक्टिविटी पहुंचाने और भविष्य के 6जी नेटवर्क के लिए हाइब्रिड संचार व्यवस्था विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। संस्थान इस क्षेत्र में शोध 2020 से काम कर रहा है।
एलईडी की रोशनी से पहुंचेगा डेटा
वाईफाई रेडियो तरंगों के जरिये डेटा भेजता है, जबकि लाईफाई में एलईडी की रोशनी की तीव्रता में बेहद तेज बदलाव कर सूचना पहुंचाई जाती है। रिसीवर इन बदलावों को डिजिटल डेटा में बदल देता है। यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि आंखों से रोशनी में होने वाला बदलाव दिखाई नहीं देता।
अस्पतालों, कार्यालयों और औद्योगिक परिसरों में यह तकनीक अतिरिक्त वायरलेस क्षमता देने में उपयोगी हो सकती है, खासकर उन स्थानों पर जहां रेडियो फ्रीक्वेंसी के हस्तक्षेप को नियंत्रित करना जरूरी है।
सोलर पैनल से डेटा रिसीव करने पर जोर
शोध का अहम पहलू सामान्य सोलर पैनलों को आप्टिकल डेटा रिसीवर के रूप में इस्तेमाल करना है। सोलर पैनल आमतौर पर रोशनी से बिजली बनाते हैं, लेकिन शोधकर्ता इनसे प्रकाश संकेतों में मौजूद डेटा प्राप्त करने की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। टीम ने सोलर पैनल आधारित सिस्टम के प्रायोगिक परीक्षण किए हैं।
यदि यह तकनीक किफायती और भरोसेमंद साबित होती है, तो अलग आप्टिकल डिटेक्टरों पर निर्भरता घट सकती है। मौजूदा सौर ऊर्जा ढांचे का उपयोग कर दूरदराज के क्षेत्रों में संचार की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।
बाधाओं के पार कनेक्टिविटी की चुनौती
लाईफाई की एक प्रमुख सीमा यह है कि दीवार या अन्य बाधा प्रकाश का सीधा रास्ता रोक सकती है। इसे दूर करने के लिए टीम आप्टिकल इंटेलिजेंट रिफ्लेक्टिंग सरफेस पर काम कर रही है। इनकी मदद से प्रकाश को परावर्तित कर उन स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है, जहां ट्रांसमीटर और रिसीवर के बीच सीधा संपर्क नहीं होता। वाहनों के बीच संचार में भी सोलर पैनल आधारित रिसीवर की उपयोगिता जांची जा रही है।
शोध की प्रमुख उपलब्धियां
- हाइब्रिड नेटवर्क: लाईफाई और वाईफाई को जोड़कर ऐसा सिस्टम विकसित करना, जिसमें जरूरत के अनुसार दोनों तकनीकों का इस्तेमाल हो।
- प्रोटोटाइप परीक्षण: नेटवर्क बदलने, उपयोगकर्ता की आवाजाही के दौरान कनेक्शन बनाए रखने और कई संचार लिंक की क्षमता इस्तेमाल करने पर काम।
- पेटेंट और शोधपत्र: टीम के अनुसार, इस क्षेत्र में कई पेटेंट मिल चुके हैं और नए आवेदन विभिन्न चरणों में हैं। शोधपत्र आइईईई जर्नल आफ लाइटवेव टेक्नोलाजी और आप्टिक्स लेटर जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
