जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को नियंत्रित करने के मामले में हाई कोर्ट सख्त है। अदालत ने श्रम विभाग के सचिव व आयुक्त को निजी तौर पर यह मामला देखने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एके चावला की पीठ ने कहा कि ऐसी एजेंसियों के पंजीकरण को लेकर वर्ष 2014 में दिए गए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए ताकि मानव तस्करी पर नजर रखी जा सके।

पीठ ने दिल्ली सरकार से भी कहा कि आदेश का आठ सप्ताह के अंदर अनुपालन किया जाए। इस संबंध में की गई कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट पेश की जाए। रिपोर्ट अतिरिक्त श्रम आयुक्त के स्तर से नीचे के अधिकारी की नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में शपथ पत्र दस दिन के अंदर दाखिल किया जाए और अगले वर्ष नौ जनवरी को होने वाली सुनवाई पर अतिरिक्त आयुक्त अदालत में मौजूद रहें। हाई कोर्ट ने करीब पांच साल पहले दिए गए आदेश में कहा था कि निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को नियंत्रित करने के लिए उनका रजिस्ट्रेशन किया जाए।

अदालत बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सितंबर 2014 के आदेश का अब तक अनुपालन नहीं किया गया। एनजीओ की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता एचएस फूल्का व अधिवक्ता प्रभाक्षय कौर ने कहा कि अवमानना याचिका इसलिए दाखिल की गई क्योंकि श्रम विभाग हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने में पूरी तरह से नाकाम रहा। एकल पीठ ने सभी तथ्यों एवं स्थितियों को देखते हुए श्रम विभाग के सचिव व आयुक्त विवेक पांडे को व्यक्तिगत तौर पर मामले को देखने का निर्देश दिया। दिल्ली सरकार द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट को देखने के बाद पीठ ने कहा कि यह सिर्फ कागजी कार्रवाई प्रतीत होती है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। दिल्ली सरकार ने इससे पहले कहा था कि अक्टूबर 2014 तक बिना रजिस्टर्ड सभी अपंजीकृत प्लेसमेंट एजेंसियां बंद कर दी जाएंगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका। एनजीओ का कहना है कि आदेश का पालन नहीं होने पर मानव तस्करी बढ़ रही है। सभी प्लेसमेंट एजेंसियों का रजिस्ट्रेशन आठ सप्ताह के अंदर करना अनिवार्य किया जाए और ऐसा न करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

Posted By: Jagran

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