गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस कार्यक्रम पर सियासी संग्राम तेज, एसजीपीसी पर गंभीर आरोप
गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस कार्यक्रम पर सियासी घमासान मचा हुआ है। एसजीपीसी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे विवाद बढ़ गया है। सियासी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है और कार्यक्रम की गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डीएसजीएमसी कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका साथ में महासचिव जगदीप सिंह काहलों व अन्य। दाएं से दूसरे) सौजन्य : डीएसजीएमसी
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। लाल किला मैदान में 23 से 25 नवंबर तक आयोजित गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) का इस कार्यक्रम में शामिल न होना और आनंदपुर साहिब में अलग से कार्यक्रम आयोजित करना दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) को खटक रहा है।
डीएसजीएमसी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने प्रेस वार्ता कर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए एसजीपीसी का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनके इशारे पर ही एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी दिल्ली के कार्यक्रम से दूर रहे।
कालका ने कहा, “गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान दिल्ली की धरती पर हुआ था। इसलिए 350वां बलिदान दिवस का मुख्य समागम यहीं होना स्वाभाविक था। सभी को आपसी मतभेद भुलाकर इसमें शामिल होना चाहिए था। मैंने स्वयं हरजिंदर सिंह धामी से अपील की थी कि वे दिल्ली के कार्यक्रम का नेतृत्व करें। उनके सामने प्रस्ताव था कि 23 से 25 नवंबर तक दिल्ली में और उसके बाद 27 से 29 नवंबर तक आनंदपुर साहिब में कार्यक्रम होंगे। उन्होंने इसे स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन बादल को खुश करने के लिए अंतिम समय में दिल्ली के कार्यक्रम से किनारा कर लिया।”
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान भी गुरु जी का 300वां बलिदान दिवस दिल्ली में ही मनाया गया था, जिसमें एसजीपीसी, अकाली दल और पंजाब सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
उन्होंने कहा कि लाल किला मैदान में आयोजित तीन दिवसीय समागम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, लेकिन एसजीपीसी के पदाधिकारी और शिअद बादल के नेता जानबूझकर दूर रहे। इससे उन्होंने गलत परंपरा की शुरुआत की है।
डीएसजीएमसी के महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि दिल्ली में शिरोमणि अकाली दल (बादल) के कुछ नेताओं ने कार्यक्रम के खिलाफ दुष्प्रचार किया था, लेकिन संगत ने भारी संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया और दुष्प्रचार करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दे दिया।

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