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CJP के प्रदर्शन 2.O से क्यों दूर रहे जेन Z? पेपर लीक पर एक, लेकिन CEC के मुद्दे पर बंटे छात्र

Published: Sat, 10 Oct 2026 08:21 PM (GMT+05:30)

सीजेपी के ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शन में जेन-जी की भागीदारी कम रही, जबकि पहले पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का व्यापक समर्थन मिला था।

सीजेपी प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारी, जागरण।

सीजेपी प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारी, जागरण।

HighLights

  1. ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर CJP प्रदर्शन में युवा कम।

  2. पहले पेपर लीक प्रदर्शन में छात्रों का व्यापक समर्थन था।

  3. कड़ी सुरक्षा, युवाओं का मोहभंग, राजनीतिक एकता की कमी।

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। देश में जेन Z की बयार बहाने वाले सीजेपी के दूसरे प्रयोग में ही युवा गायब हो गया है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर 2.0 के सफल न हो पाने के पीछे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ युवाओं का सीजेपी से मोहभंग भी है।

जेएनयू छात्र संगठन के कुछ पदाधिकारी जरूर प्रदर्शन में पहुंचे, लेकिन विश्वविद्यालय परिसरों से बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की तस्वीर सामने नहीं आई। ऐसे में सीजेपी के पहले प्रदर्शन की तुलना में इस बार राजनीतिक और छात्र समर्थन, दोनों के समीकरण बदले नजर आए।

पेपर लीक पर एकजुटता लेकिन अब समर्थन बंटा

इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं ने समर्थन दिया था। उस समय शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर छात्रों तथा विपक्षी दलों की आवाज एक साथ सुनाई दी थी।

इस बार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच विपक्षी दल सीजेपी के मंच पर एकजुट नजर नहीं आए। प्रदर्शन के दिन भी राजनीतिक दलों के नेताओं की सामूहिक मौजूदगी सीमित रही। इस प्रदर्शन से राजनीतिक समर्थन और विभिन्न दलों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठे हैं।

डीयू के छात्रावासों से नहीं निकले छात्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस, साउथ कैंपस और बाहरी दिल्ली के कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच प्रदर्शन की चर्चा रही, लेकिन जंतर-मंतर पर उनकी बड़ी भागीदारी नहीं दिखी।

डीयू के पूर्व उपाध्यक्ष राहुल झांसला ने दावा किया कि नार्थ कैंपस में पुलिस की भारी तैनाती के कारण छात्र छात्रावासों और पीजी से बाहर नहीं निकल पाए। उनके मुताबिक, इस वजह से भी प्रदर्शन में छात्रों की भागीदारी प्रभावित हुई।

आइसा और वामपंथी संगठन के छात्र हुए शामिल

जेएनयू में वामपंथी छात्र संगठन आइसा के छात्र संघ पदाधिकारी प्रदर्शन में शामिल हुए। हालांकि, अन्य छात्रों की मौजूदगी सीमित रही।

जेएनयू छात्र संघ की संयुक्त सचिव ने आरोप लगाया कि परिसर में बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोकने की कोशिश की गई और इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए सड़क पर पहुंचे।

इंटरनेट मीडिया पर भी समर्थन कम

इस बार इंटरनेट मीडिया पर भी सीजेपी के समर्थन में छात्रों की सक्रियता पहले के मुकाबले कम दिखाई दी। एनएसयूआइ ने प्रदर्शन में भाग लिया, लेकिन डीयू, जेएनयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, डीटीयू, आइआइटी दिल्ली और आंबेडकर विश्वविद्यालय से बड़ी संख्या में छात्रों को जुटाने की तस्वीर नहीं दिखी।

पेपर लीक के मुद्दे पर शिक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़े सवालों ने छात्रों को एक मंच पर जोड़ा था, लेकिन इस बार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वैसा व्यापक छात्र समर्थन नजर नहीं आया।

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