25 पीकेटी 9

प्रतिभा

-उद्यमिता मानसिकता पाठ्यक्रम की शुरुआत का हिस्सा बनीं छात्राएं

-ईएमसी के तहत अपनी रुचि के अनुसार लगाया छोले-चावल का स्टाल

जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली :

छात्राओं ने घर में ही स्वादिष्ट छोले-चावल बनाकर उन्हें बाजार में बेचने की पहल की तो ग्राहकों ने जमाकर प्रसंशा की। दरअसल, दिल्ली सरकार की ओर से राजधानी के सरकारी स्कूलों के 11वीं व 12वीं के बच्चों की मानसिकता को आकार देने के लिए उद्यमिता मानसिकता पाठ्यक्रम (ईएमसी) की शुरुआत की गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचि के अनुसार लघु उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा है। विद्यार्थियों के अलग-अलग समूह बनाकर उनकी पसंद के प्रोजेक्ट दिए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट के लिए हर विद्यार्थी को दो हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं ताकि वे अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए कुछ नया कर सकें। इसके तहत पीतमपुरा एफयू ब्लाक के सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने केएन काटजू मार्ग पर सड़क किनारे फुटपाथ पर खाने का स्टाल लगाया। विभा कुमारी व सपना ने बताया कि ईएमसी के तहत स्कूल के बच्चों को प्रोजेक्ट दिया गया है। उनकी रुचि खाना बनाने में है इसलिए उन दोनों ने मिलकर खाने का स्टाल लगाने पर विचार किया। इसके बाद पहले चावल-छोले बनाने के लिए सामान खरीदकर लाए व स्टाल लगाने के लिए टेबल व कुर्सियों का इंतजाम कर सड़क पर स्टाल लगा दिया। विभा कुमारी ने बताया कि उन्होंने छोले-चावल व सलाद का स्टाल लगाया है। वह यह खाना घर से बनाकर यहां लाए हैं। खुद बनाए छोले-चावल की हाफ प्लेट 20 व फुल प्लेट 30 रुपये में ग्राहकों को दी। दोनों ने मिलकर 1500 रुपये से लगाए स्टाल से कुछ ही देर में 400 रुपये की बिक्री कर ली थी। विभा कुमारी व सपना ने बताया कि उनके किसी साथी ने फोन कवर तो किसी ने कपड़ों का स्टाल लगाया है।

लोगों को खूब पसंद आया खाना जहां पर छात्राओं ने छोले-चावल का स्टाल लगाया था, उसके पास ही एक व्यक्ति महीनों से छोले-चावल व छोले भठूरे की रेहड़ी लगाता है। रेहड़ी पर लोगों की भीड़ लगी रहती है। छात्राओं की ओर से स्टाल लगाने पर रेहड़ी वाले के काफी ग्राहक नए स्टाल पर खाना खाने पहुंच गए। क्योंकि यहां पर उन्हें खाना सस्ता भी मिल रहा था और घर का स्वाद भी था। साथ में बैठकर खाने के लिए टेबल व कुर्सियों का भी प्रबंध किया हुआ था। इस वजह से रेहड़ी वाला थोड़ा असहज महसूस करता दिखा। वह अपनी रेहड़ी पर आने वाले ग्राहकों पर कम व छात्राओं के पास छोले-चावल खाने वाले लोगों पर ज्यादा ध्यान दे रहा था। हालांकि जो भी बच्चों के स्टाल पर खाना खाता वह खाने की तारिफ किए बिना नहीं रह पाता था। उनको खाना काफी पसंद आया।

Edited By: Jagran