जागरण संवाददाता, नई दिल्ली:

महाराष्ट्र ही नहीं दिल्लीवासी भी भगवान गणेश की भक्ति में लीन हो गए हैं। शुक्रवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अनेक पंडालों के साथ ही अपने घरों में विघ्नहर्ता की मूर्ति स्थापित की। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस बार श्रद्धालुओं ने इको फ्रेंडली गणेश की मूर्तियों को ज्यादा तरजीह दी है। इस दौरान दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बने गणेश पंडालों में गणेश की मूर्ति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

राजधानी में शुक्रवार को धूमधाम से गणेश चतुर्थी मनाई गई। जगह-जगह ढोल-नगाड़ों के साथ भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए कलशयात्रा निकालकर गणेश की मूर्तियां पंडालों में स्थापित की गईं। गली-मोहल्लों से लेकर सड़कों तक गणेश चतुर्थी की धूम रही। भक्त भगवान गणेश की आस्था में लीन रहे। बाजारों में मूर्तियों की जमकर खरीदारी हुई। कोई कार में मूर्ति लेकर गया तो कोई रथ पर सवार कर लंबोदर को घर ले गया। सार्वजनिक पंडालों में कहीं तिरुपति बालाजी के रूप में तो कहीं लालबाग के राजा के रूप में भगवान गणेश विराजमान हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। मूर्ति स्थापना के बाद भक्तों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। पंडालो में कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय कलाकारों के साथ शहर से बाहर के कलाकारों ने धार्मिक कार्यक्रम पेश किए।

बेहद खूबसूरत ढंग से सजाए गए हैं पंडाल

राजधानी में पंडालों को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया गया था। दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में भी गणेश भगवान की मूर्ति स्थापित की गई है, जिसकी पूजा-अर्चना के लिए मराठी समुदाय के लोग पहुंचे। इस दौैरान पूरा परिसर गणपति बप्पा के जयकारों से गूंज उठा। पांच सितंबर को विसर्जन किए जाने तक दिल्ली गणेश भगवान की भक्ति में सराबोर रहेगी। महाराष्ट्र सदन में गणपति बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचे गौरव पाटिल कहते हैं कि यहां पर वे बप्पा से आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे हैं। घर पर भी गणेश भगवान की छोटी-सी मूर्ति स्थापित की है। रोजाना नियमित तौर पर सुबह और शाम उनकी विशेष पूजा करते हैं। हमारे लिए यह साल भर का सबसे बड़ा उत्सव होता है। वहीं, करोलबाग की अपेक्षा खंडेलवाल बताती हैं कि पिछले दस सालों से उनके घर पर गणेश भगवान की मूर्ति को स्थापित किया जा रहा है। भगवान गणेश के आशीर्वाद से हमारे सभी काम पूरे हुए हैं। रोजाना भगवान को तरह-तरह के मिष्ठानों से भोग लगाया जाता है, जिसमें मोदक के लड्डू विशेष तौर पर होते हैं।

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