जागरण संवाददाता, दिल्ली :

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पूर्वी दिल्ली निगम में सस्ते ई-रिक्शा टिपर ट्रायल के तौर पर आए थे, लेकिन इसको लेकर लिए निर्णय व ट्रायल के नतीजों को लेकर अब तक कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की गई।

इस मसले को पार्षद श्याम सुंदर अग्रवाल ने पर्यावरण प्रबंधन सेवाएं समिति की बैठक में जोरशोर से उठाया। बैठक में अन्य पार्षदों ने भी ऑटो टिपर को लेकर हो रही समस्याओं को उठाया।

श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि ऑटो टिपर की समस्या का समाधान उन्होंने निगम को सुझाया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि हम ऑटो टिपर को दो माह का जितना किराया दे रहे हैं उतने में ई-रिक्शा टिपर आ जाएंगे। इस सुझाव पर कुछ अधिकारियों ने पहल की और चार ई-रिक्शा टिपर ट्रायल के लिए मंगवाए गए थे, लेकिन ट्रायल के नतीजे क्या रहे, इस पर अधिकारियों ने कुछ नहीं कहा। उस रिपोर्ट को समिति में पेश भी नहीं की गई। पार्षद अब्दुल रहमान ने कहा कि वार्डो में जितने ऑटो टिपर दिए जाने चाहिए उस हिसाब से मिले नहीं हैं। इससे कूड़ा उठाने में समस्या आ रही है। कुमारी ¨रकू ने कहा कि ऑटो टिपर में लॉगबुक नहीं होता, जिससे पता चल सके कि वे कितना काम कर रहे हैं। जीपीएस लगे होने के बाद भी उनकी कार्यप्रणाली नहीं सुधरी है। हिमांशी पांडेय ने कहा कि जाम नालियों की सफाई के लिए छोटी सुपर सकर मशीन भी होनी चाहिए, जिससे छोटी गलियों में भी सफाई की जा सके। उन्होंने कहा कि शौचालयों में पानी का प्रेशर नहीं है, जिससे सफाई में दिक्कत आ रही है। पुनीत शर्मा ने कहा कि सफाई व्यवस्था से कोई पार्षद खुश नहीं है। पांच साल में आबादी काफी बढ़ गई है, लेकिन संसाधनों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। पार्षद मोहिनी ने सफाई कर्मचारियों को वेतन व एरियर देने की मांग की। कई पार्षदों ने ट्रैक्टर ट्रॉली हटाने का मामला भी उठाया। समिति के चेयरमैन केके अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि वे सभी वार्डो को एक नजर से देखें। कहीं ट्रैक्टर ट्रॉली चलाए जा रहे हैं तो कहीं मना किया जा रहा है। उन्होंने ई-रिक्शा टिपर के ट्रायल को लेकर पूरी रिपोर्ट मांगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संसाधन बढ़ाएं।

By Jagran