जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली:

निगम क्षेत्र में वैध की आड़ में अवैध पार्किग चलाई जा रही है। इसके लिए जितना इलाका आवंटित किया गया है उससे सात से दस गुना अधिक जगहों पर ठेकेदार पार्किंग करवा रहे हैं। इससे मोटी रकम की वसूली हो रही है। यह कार्य बिना विभिन्न विभागों के सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। पूर्वी निगम स्थायी समिति के अध्यक्ष सत्यपाल ¨सह ने मिल रही शिकायतों के मद्देनजर जब गांधी नगर पुश्ता और जगप्रवेश चंद्र पार्किग स्थल का औचक दौरा किया तो वहां तय जगह से काफी अधिक जगह पर पार्किग पाई गई।

सत्यपाल ¨सह गांधी नगर पुश्ते पर जब निगम अधिकारियों के साथ पहुंचे तो वहां की स्थिति देखकर हैरत में पड़ गए। यहां ठेकेदार को 1758 वर्गमीटर जगह आवंटित की गई है, लेकिन गाड़ियां 20 हजार वर्गमीटर जमीन में खड़ी की गई थीं। यहां पुश्ता रोड पर तो सैकड़ों गाड़ियां खड़ी ही थीं, साथ ही यमुना खादर क्षेत्र में भी सैकड़ों गाड़ियां पार्क की गई थी। यहां दो हजार से अधिक गाड़ियां अवैध रूप से खड़ी की गई थी। इसे देख स्थायी समिति अध्यक्ष भड़क गए। उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे कई लोगों से भी बात की जिनकी यहां गाड़ियां खड़ी थीं। उन्होंने बताया कि वह 1500 रुपये प्रति महीने के हिसाब से राजेंद्र नामक व्यक्ति से पर्ची कटवाते हैं, जबकि गांधीनगर की पार्किग का ठेकेदार राजेश कुमार ¨सह है। ठेकेदार के कर्मचारियों का कहना था कि वह तय जगह ही पार्किंग करवाते हैं अन्य जगहों पर कुछ लोग अवैध रूप से गाड़ियां पार्क करवाते हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने निगम से कई बार की है। स्थानीय पार्षद रोमेश गुप्ता कहते हैं कि यहां 15 वर्ष से ¨सचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी व पुलिस की मिलीभगत से अवैध पार्किग कर लाखों रुपये का खेल किया जा रहा है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

स्थायी समिति अध्यक्ष ने पार्षद केके अग्रवाल के साथ जगप्रवेश चंद अस्पताल के पास चल रही पार्किग का भी निरीक्षण किया। यहां भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी थी। जगह 1985 वर्गमीटर दी गई थी, लेकिन इस्तेमाल 15 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा स्थान का हो रहा था। यहां गाड़ियों से अवैध वसूली भी हो रही थी। प्रति घंटे 20 रुपये लेने के बजाय कारों से 50 रुपये लिया जा रहा था। यहां कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे व बैरिकेड, ग्लो साइन बोर्ड नहीं लगे थे और कर्मचारी वर्दी में नहीं थे। निगम अधिकारियों ने बताया कि यहां इससे पहले भी गड़बड़ी पाई गई थी, जिससे पार्किंग ठेकेदार पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, लेकिन हालात में सुधार अब तक नहीं हुआ था।

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