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कैबिनेट मंत्रियों का नाम दूसरे क्षेत्र की वोटर लिस्ट में क्यों? चुनाव आयोग ने दिया जवाब

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:42 PM (IST)

चुनाव आयोग ने कैबिनेट मंत्रियों के मतदाता सूची में नाम दर्ज होने संबंधी नियमों पर स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने ...और पढ़ें

मतदाता में नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने नियमों की स्थिति स्पष्ट की है। एआई इमेज

मतदाता में नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने नियमों की स्थिति स्पष्ट की है। एआई इमेज

HighLights

  1. चुनाव आयोग ने कैबिनेट मंत्रियों के मतदाता सूची नियमों पर स्पष्टीकरण दिया।

  2. जनप्रतिनिधियों और घोषित पदों पर बैठे लोगों के नाम ड्राफ्ट रोल में।

  3. दावे-आपत्तियों की अवधि में आवश्यक दस्तावेज जुटाने का उद्देश्य।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में कैबिनेट मंत्रियों के उनके सामान्य निवास स्थान के बजाय किसी अन्य जगह की मतदाता में नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने नियमों की स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि एसआईआर के ड्राफ्ट रोल में पहले से फ्लैग किए गए जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर बैठे लोगों और कुछ अन्य वर्गों के नाम शामिल किए गए हैं, ताकि दावे और आपत्तियों की समयावधि में जरूरी दस्तावेज जुटाए जा सकें।

क्या बताया चुनाव आयोग ने?

आयोग ने 14 मई के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि ड्राफ्ट रोल प्रकाशित करते वक्त न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों के धारकों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल और सार्वजनिक सेवा क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के उन नामों को ड्राफ्ट रोल में शामिल किया गया है, जिन्हें पहले इलेक्ट्रोल डेटाबेस में फ्लैग किया गया था। इसका उद्देश्य दावे और आपत्तियों की समयावधि में संबंधित दस्तावेज जुटाना है।

सांसद और विधायक के लिए अलग प्रविधान

चुनाव आयोग ने रिप्रजेंटेशन ऑफ द पियुपल एक्ट, 1950 की धारा 20(1बी) का भी उल्लेख किया। इसके मुताबिक कोई सांसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान केवल अपने कर्तव्यों के सिलसिले में निर्वाचन क्षेत्र से अनुपस्थित रहने के कारण उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना बंद नहीं माना जाएगा, जहां चुनाव के वक्त वह मतदाता के रूप में पंजीकृत था।

वहीं, धारा 20(4) के तहत राष्ट्रपति द्वारा चुनाव आयोग से परामर्श के बाद कुछ पदों को इस प्रावधान के दायरे में घोषित किया गया है। ऐसे पद पर रहने वाला व्यक्ति उस निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवासी माना जाता है, जहां वह संबंधित पद पर नहीं होता तो सामान्य रूप से निवासी होता।

कई संवैधानिक और सरकारी पद शामिल

18 अप्रैल 1960 की अधिसूचना के तहत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल, केंद्र या राज्य के कैबिनेट मंत्री, राज्यसभा और विधानसभा के कुछ पीठासीन पदों के साथ-साथ केंद्र या राज्य के मंत्री, उपमंत्री और संसदीय सचिव जैसे पद इस प्रविधान में शामिल किए गए हैं।

इसमें लोकसभा और विधानसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, राज्य विधान परिषद के सभापति और उपसभापति व केंद्र शासित प्रदेशों के एलजी भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि आयोग का यह स्पष्टीकरण दिल्ली में एसआईआर के दौरान कैबिनेट मंत्रियों के मतदाता पंजीकरण को लेकर उठे सवालों के संदर्भ में आया है।

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