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सत्य निकेतन हादसे में मुआवजे की मांग पर डूसू उपाध्यक्ष का सत्याग्रह जारी, बोले- मांग पूरी न होने तक करेंगे सत्याग्रह

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:24 PM (IST)

डूसू के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने सत्य निकेतन घटना के प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए अपना सत्याग्रह जारी रखने की बात कही है।

डूसू के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने मुआवजे की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र सौंपा था। फाइल फोटो

डूसू के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने मुआवजे की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र सौंपा था। फाइल फोटो

HighLights

  1. डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन का सत्याग्रह जारी रहेगा।

  2. सत्य निकेतन घटना के प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग।

  3. ठोस निर्णय न होने पर धरने पर बैठने की चेतावनी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सत्य निकेतन घटना में प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर डूसू के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांग पर कार्रवाई का आश्वासन मिला है, लेकिन अभी तक मुआवजे को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में मांग पूरी होने तक वह छात्रों की आवाज उठाते रहेंगे।

बोले- कब तक करेंगे सत्याग्रह?

दीपांशु ने बताया कि उन्होंने मुआवजे की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र सौंपा था। इसके बाद वित्त अधिकारियों को भी इस संबंध में सलाह भेजे जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से उठाया गया यह कदम सकारात्मक है, लेकिन इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। जब तक प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक सत्याग्रह खत्म नहीं किया जाएगा।

मांग नहीं मानी तो देंगे धरना

दीपांशु ने कहा कि केवल आश्वासन से प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिलेगी। प्रशासन को मुआवजे पर स्पष्ट निर्णय लेना होगा। यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका मुख्य उद्देश्य प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को राहत दिलाना है।

उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों पर जो भी संगठन या राजनीतिक दल साथ आएगा, उसके साथ सहयोग किया जाएगा। दीपांशु स्पष्ट किया कि उनका ध्यान किसी संगठन के साथ जुड़ने के बजाय छात्रों की मांग को मजबूती से उठाने पर है।