एग्जाम दिया, अटेंडेंस शीट पर साइन किए... फिर भी DU ने अनुपस्थित बताया; विधि संकाय के अंतिम वर्ष के छात्र परेशान
दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के लगभग 60 छात्रों को परीक्षा देने के बावजूद परिणाम में अनुपस्थित दिखाया गया है।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
HighLights
लगभग 60 विधि संकाय छात्रों को परिणाम में अनुपस्थित दर्शाया गया।
छात्रों ने परीक्षा दी और उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर भी किए।
विश्वविद्यालय ने रिकॉर्ड विसंगतियों को कारण बताया, सुधार प्रक्रिया जारी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के विधि संकाय के करीब 60 छात्रों को परीक्षा देने के बावजूद परिणाम में अनुपस्थित दर्शाए जाने का मामला सामने आया है।
छात्रों का दावा है कि उन्होंने परीक्षा में शामिल होकर उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर भी किए थे, इसके बावजूद 30 जुलाई को जारी परिणाम में उन्हें अनुपस्थित कर दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी विधि संकाय से ऐसे 50-60 मामले सामने आने की पुष्टि की है।
कैंपस ला सेंटर के एक अंतिम वर्ष के छात्र ने बताया कि उसने 28 मई को प्रशासनिक विधि की परीक्षा दी थी। 30 जुलाई को परिणाम देखने पर उसे अनुपस्थित दर्शाया गया।
उपस्थिति सूची में मौजूद थे हस्ताक्षर
प्रशासन से संपर्क करने पर परीक्षा की उपस्थिति सूची देखी गई, जिसमें उसके हस्ताक्षर मौजूद थे। इसके बाद उसे आवेदन देने और परिणाम अपडेट होने के लिए 10-15 दिन इंतजार करने को कहा गया।
छात्र को चिंता है कि उसकी उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन हुआ है या नहीं और उसके अंक सही उत्तरपुस्तिका से जोड़े जाएंगे या नहीं।
इसी तरह एक अन्य छात्र ने 18 मई को हुई संवैधानिक विधि की परीक्षा देने के बावजूद परिणाम में अनुपस्थित किए जाने की शिकायत की है।
गलत अनुक्रमांक और दूसरे कक्ष में परीक्षा से भी गड़बड़ी
डीयू के परीक्षा नियंत्रक गुरप्रीत सिंह टुटेजा के अनुसार, ये मामले परीक्षा रिकार्ड में विसंगतियों से जुड़े हैं। कुछ छात्रों ने गलत अनुक्रमांक भरा, कहीं नाम गलत दर्ज हुआ, जबकि कुछ छात्र आवंटित कक्ष के बजाय दूसरे कक्ष में परीक्षा देने पहुंचे।
ऐसे मामलों में रिकार्ड का मिलान नहीं होने पर परिणाम रोक दिया जाता है और छात्र को अनुपस्थित दर्शाया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में रेड एंट्री की जाती है और विसंगति दूर होने के बाद परिणाम जारी किया जाता है।
टुटेजा के मुताबिक, करीब 10 हजार छात्रों के मुकाबले 50-60 मामले कम हैं। विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष के छात्रों के समेकित परिणाम जल्द जारी करने के लिए सप्ताहांत में भी काम करेगा, ताकि बार काउंसिल आफ इंडिया में पंजीकरण में देरी न हो।
